श्री विट्ठल रुक्मिणी मंदिर की पूरी भूमि मिलने तक संघर्ष जारी रखेंगे – हिन्दू जनजागृति समिति

हिन्दू जनजागृति समिति तथा हिन्दू विधिज्ञ परिषद की याचिका का परिणाम !

श्री विट्ठल रुक्मिणी मंदिर को दान में मिली भूमि में से और 117 एकड भूमि पुनः मिली; पूरी भूमि मिलने तक संघर्ष जारी रखेंगे ! – हिन्दू जनजागृति समिति

      पंढरपुर,दिनांक 1.2.2021 श्री विठ्ठल के चरणों में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पण की गई सैकडों एकड भूमि में से 117 एकड भूमि मंदिर समिति ने यातायात बंदी के काल में अपने नियंत्रण में ले ली है, ऐसा हाल ही में देवस्थान समिति ने घोषित किया । श्री विट्ठल की कृपा से ही यह भूमि वापस मिली, ऐसी हमारी श्रद्धा है । ऐसी स्थिति में भी, भगवान विट्ठल की पूरी भूमि पुनः मिलने तक हम अपना संघर्ष जारी रखेंगे, ऐसा मत हिन्दू जनजागृति समिति के राज्य संगठन श्री सुनील घनवट ने इस समय व्यक्त किया ।

पंढरपुर के श्री विट्ठल रुक्मिणी मंदिर की सरकार नियुक्त समिति ने देवस्थान की संपत्ति में भारी घोटाला किया है, हिन्दू जनजागृति समिति तथा हिन्दू विधिज्ञ परिषद ने यह प्रमाण सहित उजागर किया था । इस विषय में हिन्दू जनजागृति समिति ने समय-समय पर आंदोलन भी किए थे । वर्ष 2014 में हिन्दू विधिज्ञ के परिषद के माध्यम से हिन्दू जनजागृति समिति ने श्री विट्ठल मंदिर की 1250 एकड भूमि घोटाले के विरोध में मुंबई उच्च न्यायालय में जनहित याचिका प्रविष्ट की थी । माननीय न्यायालय ने इस याचिका का संज्ञान लेते हुए महाराष्ट्र्र शासन तथा मंदिर समिति को प्रतिज्ञा पत्र देने के आदेश दिए थे । साथ ही न्यायालय ने तहसीलदारों के पथक तैयार कर देवस्थान की भूमि खोजने के आदेश दिए थे । इसके परिणाम स्वरूप इससे पूर्व देवस्थान समिति को 900 एकड भूमि वापस मिली थी । अब और 117 एकड भूमि वापस मिली है । अब तक कुल 1017 एकड भूमि वापस पाने में सफलता मिली है ।


श्री. घनवट ने आगे कहा, श्री विट्ठल रुक्मिणी मंदिर समिति को श्रद्धालुओं ने आज तक ढाई सहस्त्र एकड से अधिक भूमि अर्पण की है, ऐसी जानकारी हमारे पास है । इसमें से अभी तक 1400 भूमि वापस नहीं मिली है । मूल प्रश्‍न यह है कि इतने वर्ष यह भूमि अपने नियंत्रण में लेने का काम मंदिर समिति ने स्वयं क्यों नहीं किया । मंदिर का व्यवस्थापन अच्छा करने के नाम पर मंदिरों का सरकारीकरण करना और यहां भी सरकारी पद्धति से भ्रष्टाचार करना, अत्यंत गंभीर है । यह मंदिरों के सरकारीकरण का दुष्परिणाम है । केवल हिन्दुओं के ही मंदिर धर्मनिरपेक्ष शासन अपने नियंत्रण में लेता है । यदि हिम्मत है तो मुसलमानों के मस्जिद और ईसाइयों के चर्च का भी सरकारीकरण करके दिखाइए, और यदि ऐसा करने का साहस ना हो, तो मंदिरों का सरकारीकरण बंद करो।

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