विशेषज्ञों का सुझाव: सहनशीलता विकसित करें, पीछे मुड़कर देखें कि महामारी के दौर की ऐसी कौन सी आदतें हैं जिन्हें कायम रखना आगे भी फायदेमंद

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17 मिनट पहलेलेखक: तारा पार्कर पोप

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जिंदगी में चार तरह के बदलाव लाकर अनिश्चितता दूर कर सकते हैं। - Dainik Bhaskar

जिंदगी में चार तरह के बदलाव लाकर अनिश्चितता दूर कर सकते हैं।

महामारी के 14 महीनों के बाद कैसा महसूस कर रहे हैं, तो जवाब होगा ‘अशांति, चिंता और घबराहट..।’ हाल ही में अमेरिकी लोगों से उनकी भावनाएं साझा करने के लिए कहा गया तो उन्होंने भी अस्थिरता, चिंता, घबराहट, थकान, उम्मीद, आशावाद, तनावपूर्ण, त्रस्त और उत्साह की बात कही।

अमेरिकी सीडीसी के मुताबिक 30% लोग अब भी चिंता, अवसाद का अनुभव कर रहे हैं। ऐसी अनिश्चितता व चिंता की भावनाओं से निपटने और नई शुरुआत के लिए मानसिक तैयारी करनी होगी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इन 4 तरीकों से चुनौतियों से निपट सकते हैं…

1. कुछ चीजाें के जवाब अभी नहीं मिल सकते, हालात के साथ सहज रहें

जो पता नहीं है, उसकी चिंता करेंगे तो चिंता और तनाव के अलावा कुछ हासिल नहीं होगा। पर जब आप यह स्वीकार कर लेंगे कि कुछ चीजों के जवाब अभी नहीं मिल सकते तो ऐसी स्थिति में आप खुद में ‘आपदा में सहनीशलता’ का गुण विकसित कर लेते हैं। यह आपको भावनात्मक तौर पर मजबूत बनाता है।

ब्राउन यूनिवर्सिटी में रिसर्च एंड इनोवेशन के डायरेक्टर डॉ. जुडसन ब्रूअर के मुताबिक अगर हम खुद को यह समझा पाते हैं कि हमें जब तक कुछ पता नहीं होगा, हम चीजों को नहीं बदल सकते। अनिश्चितता के साथ सहज होना सबसे अच्छी प्रतिक्रिया है। इसके अलावा नकारात्मक विचारों को दूर करने के लिए मल्टी सेंसरी एक्सरसाइज कर सकते हैं।

2. महामारी की अच्छी आदतों को पहचानें

इन दिनों बड़ी चिंता यह है कि महामारी के दौर में धीमी गति वाली जिंदगी, जल्द ही हमारी पिछली आपाधापी वाली दिनचर्या से बदल जाएगी। व्हार्टन स्कूल की प्रो. केटी मिल्कमैन लोगों को सलाह देती हैं कि पीछे मुड़कर देखें, महामारी के दौरान अपनाई कौन सी आदतों को आप बरकरार रखना चाहते हैं। जैसे हम कई कामों के लिए जूम पर शिफ्ट हो गए। यह ध्यान रखना होगा कि हम वापस पुराने ढर्रे में न लौट जाएं।

3. संबंध मजबूत करें

बहुत सारे अध्ययनों से पता चलता है कि सामाजिक संबंध हमें चिंता से निपटने में मदद करते हैं। न्यूयॉर्क स्टेट यूनिवर्सिटी के ऑर्थर एरॉन ने चिंतित लोगों को ऐसे सवाल दिए जिनकी मदद से वे अजनबी लोगों से बात कर सकें, खुद को व्यक्त कर सकें। इनसे लोगों को अजनबियों को दोस्त बनाने में मदद मिली। करीबी रिश्ते मजबूत हुए।

4. खुद को दोष न देते रहें

लोगों को लगता है कि महामारी में वे दिनचर्या ठीक नहीं रख पाए। इससे वजन बढ़ गया और उन्हें अब ग्लानि होती है। टेक्सास यूनिवर्सिटी की डॉ. क्रिस्टिन नेफ्फ के मुताबिक खुद को दोष देने से बचें। सिर्फ यह सोचें कि सुधार के लिए क्या करना है। यदि खुद को ऐसे ही आंकते रहेंगे, तो अपने आप को नुकसान पहुंचाएंगे। जितना खुद को स्वीकार करेंगे, उतने सकारात्मक बदलाव ला सकेंगे।

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