दुष्कर्म मामला: अदालत द्वारा तरुण तेजपाल को बरी किए जाने के खिलाफ गोवा सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर की याचिका, पीड़िता की बदनामी का दिया हवाला

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मुंबई11 मिनट पहले

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तेजपाल के साथ काम करने वाली महिला कर्मचारी ने उन पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। - Dainik Bhaskar

तेजपाल के साथ काम करने वाली महिला कर्मचारी ने उन पर यौन शोषण का आरोप लगाया था।

तहलका मैगजीन के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल की परेशानियां कम होती नजर नहीं आ रही है। गोवा सरकार ने तेजपाल के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर उनके खिलाफ फिर से सुनवाई की अपील की है। अदालत में दायर याचिका में सरकार ने इस मामले में, फैसले के बाद पीड़ित को लगने वाले आघात और उसके चरित्र पर सवाल उठाने को लेकर अदालत की समझ के अभाव का तर्क दिया है।

21 मई को सत्र न्यायाधीश क्षमा जोशी ने ‘तहलका’ पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक तेजपाल को नवंबर 2013 में एक पांच सितारा होटल की लिफ्ट महिला साथी के यौन उत्पीड़न के मामले में बरी कर दिया था।

हाईकोर्ट की गोवा पीठ के समक्ष दाखिल अपील में इस सप्ताह संशोधन करके निचली अदालत के निर्णय के पहलुओं और तेजपाल को बरी किए जाने के खिलाफ दलीलों को शामिल किया गया है।

पीड़िता के साक्ष्यों को नजरअंदाज करने का आरोप
सरकार ने कहा कि बचाव पक्ष के वकील की ओर से पेश किए गए सबूतों को निचली अदालत ने न केवल अकाट्य सच माना, बल्कि पीड़िता के साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष के गवाहों को भी नजरअंदाज कर दिया। सरकार ने दावा किया कि अदालत ने इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य (माफी वाले ई-मेल) को भी पूरी तरह अनदेखा कर दिया, जिसमें आरोपी का दोष साफ तौर पर जाहिर होता है।

कोर्ट ने ये तथ्य हटाने की अपील
गोवा सरकार ने बाद में इस निर्णय के खिलाफ अपील की। अभियोजन ने हाई कोर्ट में दाखिल अपील में निचली अदालत के निर्णय के उन विभिन्न हिस्सों को हटाने का अनुरोध किया, जो न केवल अभियोजन पक्ष बल्कि पीड़ित पर भी आक्षेप लगाते हैं। अभियोजन ने कहा, ‘इस तथ्य और अन्य पहलुओं से स्पष्ट होता है कि मामले की कानून के अनुसार फिर से जांच होनी चाहिए।’

बंद कमरे में हुई सुनवाई

ये केस गोवा के मापुसा के सेशन कोर्ट में चल रहा था। एडिशनल जज क्षमा जोशी ने इस साढ़े सात साल पुराने केस में पिछले महीने फैसला सुरक्षित रखा था। तेजपाल के कहने पर केस की सुनवाई बंद कमरे में की गई। इस मामले में गोवा पुलिस का पक्ष स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर फ्रांसिस्को तवोरा ने रखा, वहीं वकील राजीव गोम्ज और आमिर खान ने कोर्ट में तेजपाल का केस लड़ा।

पहले 3 बार टला था फैसला

तेजपाल के खिलाफ दुष्कर्म के मामले में कोर्ट 27 अप्रैल को फैसला सुनाने वाली थी, लेकिन जज क्षमा जोशी ने फैसला 12 मई तक स्थगित कर दिया था। फिर 12 मई को फैसला 19 मई तक के लिए टाल दिया गया था। इसके बाद फिर 2 दिन के लिए टालते हुए 21 मई को फैसला सुनाने के लिए कहा था। कोर्ट का कहना था कि कोरोना महामारी के चलते स्टाफ की कमी है इसलिए फैसला टाला जा रहा है।

क्या है मामला?

2013 में तेजपाल के साथ काम करने वाली एक युवती ने उन पर गोवा के एक फाइव स्टार होटल की लिफ्ट में रेप का आरोप लगाया था। 30 नवंबर 2013 को तेजपाल को गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए अपील भी की थी, लेकिन कोर्ट ने उन्हें कोई राहत देने से इनकार कर दिया था। मई 2014 से तेजपाल जमानत पर हैं।

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