महाराष्ट्र में इसलिए रद्द हुई 10वीं की परीक्षा: राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया-16 लाख छात्र एग्जाम के लिए जाते तो बढ़ता संक्रमण का खतरा, राज्य में अब तक 6 लाख बच्चे हुए संक्रमण का शिकार


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मुंबई22 मिनट पहले

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महाराष्ट्र में दसवीं कक्षा में तकरीबन 16 लाख छात्र हैं। संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए राज्य सरकार से सभी छात्रों को अगली कक्षा में पास करने का निर्णय लिया है। - Dainik Bhaskar

महाराष्ट्र में दसवीं कक्षा में तकरीबन 16 लाख छात्र हैं। संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए राज्य सरकार से सभी छात्रों को अगली कक्षा में पास करने का निर्णय लिया है।

महाराष्ट्र में करीब 6 लाख बच्चे अब तक कोरोना संक्रमण का शिकार हुए हैं। इसमें से चार लाख बच्चे 11 से 20 साल के बीच के हैं। राज्य सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में बताया है कि बच्चों में संक्रमण के खतरे को देखते हुए 10वीं की परीक्षा को रद्द कर दिया गया है। पुणे निवासी धनजंय कुलकर्णी ने 10वीं की परीक्षा रद्द करने के राज्य सरकार के निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। इस याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार से परीक्षा रद्द किए जाने को लेकर स्पष्टीकरण मांगा था।

कोरोना का था खतरा, इसलिए रद्द की 10वीं की परीक्षा
इसी के जवाब में राज्य सरकार की ओर से दायर हलफनामे में कहा गया है कि 10वीं कक्षा की परीक्षा में 16 लाख विद्यार्थी शामिल होंगे। परीक्षा के आयोजन में करीब चार लाख स्टॉफ की जरूरत पड़ेगी। इसके अलावा पुलिस बंदोबस्त व स्वास्थ्यकर्मी भी लगेंग। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में बताया कि परीक्षा के दौरान कम से कम से आठ से नौ बार विद्यार्थियों को परीक्षा केंद्र में जाना पड़ेगा। जिससे उनके कोरोना संक्रमण की चपेट में आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। राज्य सरकार का कहना है कि 12वीं कक्षा की परीक्षा 10वीं से अधिक महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि यह शिक्षा का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है, इसके बाद ही छात्र अपने कैरियर का चुनाव करते हैं।

कागज से भी संक्रमण के खतरे की बात कही
10वीं की परीक्षा में अलग-अलग माध्यम के 60 विषय के करीब 158 प्रश्न पत्र होते हैं। उत्तर पुस्तिकाओं को परीक्षा केंद्रों तक पहुचाना भी काफी मुश्किल भरा है। राज्य सरकार ने कागज से कोरोना संक्रमण फैलने की आशंका को भी परीक्षा टाले जाने की एक वजह बताई है। हलफनामे के अनुसार, परीक्षा के दौरान एक विद्यार्थी को कम से कम आठ से नौ बार परीक्षा के लिए अभिभावक के साथ घर से बाहर निकलना पड़ेगा, इससे संक्रमण का खतरा लगातार बना रहेगा।

परीक्षा करवाई तो बच्चों को ट्रेवल करना होगा
राज्य सरकार ने हलफनामे में कहा है कि कोरोना के चलते लगे प्रतिबंध के चलते बहुत से बच्चे अपने गांव चले गए हैं। लॉकडाउन के चलते उनका अभी अपने घर लौट पाना मुश्किल होगा। जून से सितंबर का महीना परीक्षा के लिए उचित नहीं माना जाता है, क्योंकि इस दौरान राज्य के कई इलाकों में काफी बारिश होती है। ऐसे में कक्षा दसवीं की परीक्षा का आयोजन काफी चुनौतीपूर्ण व जीवन के लिए जोखिम भरा बन गया है।

हलफनामे के मुताबिक, राज्य के मेडिकल शिक्षा विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक पांच लाख 73 हजार बच्चे कोरोना संक्रमण का शिकार हुए हैं। इसमें से 4 लाख बच्चे 11 से 20 साल की उम्र के हैं। अब कोरोना की तीसरे लहर की भी संभावना व्यक्त की जा रही है। जिसमें बच्चों को अधिक खतरा होने की बात कही जा रही है। इस लिहाज से परीक्षा आयोजन बच्चों के स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकता है।

इसलिए करवा रहे हैं 12वीं की परीक्षा
हलफनामे में सरकार ने कहा है कि कक्षा 12 वी और कक्षा 10वीं के विद्यार्थियों की तुलना नहीं कि जा सकती है। क्योंकि 12वीं के विद्यार्थी कक्षा दसवीं के छात्रों की तुलना में शारीरिक, मानसिक व जागरूकता के लिहाज से अधिक परिपक्व होते हैं। इस लिहाज से कक्षा 12 वीं व 10वीं के विद्यार्थियों की तुलना ऐसा होगा जैसे सेब व चीज की तुलना की जा रही है। हलफनामे में कहा गया है कि 12वीं की परीक्षा कैरियर के चुनाव के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। इसलिए 12वीं की परीक्षा रद्द नहीं कि गई है। हालांकि अभी इस बारे में अंतिम निर्णय नहीं किया गया है।

हलफनामे में सरकार ने स्पष्ट किया है कि सरकार ने अपने अधिकारों के तहत कक्षा दसवीं की परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया है। राज्य बोर्ड़ के अलावा CBSE, ICSE व इंटरनेशनल बोर्ड ने भी कक्षा दसवीं की परीक्षा रद्द करने का फैसला किया है। सरकार ने सर्वेक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों का मत जानकर उनके मूल्यांकन की व्यवस्था बनाई है। इस बारे में शासानादेश भी जारी किया है।

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