अमेरिका ने जासूसी के लिए डेनिश केबल का लिया सहारा, डेनमार्क मीडिया का दावा

[ad_1]

दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी ने डेनमार्क के विदेशी खूफिया इकाई की साझेदारी का इस्तेमाल कर जासूसी को अंजाम दिया है. (सांकेतिक तस्वीर: Shutterstock)

दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी ने डेनमार्क के विदेशी खूफिया इकाई की साझेदारी का इस्तेमाल कर जासूसी को अंजाम दिया है. (सांकेतिक तस्वीर: Shutterstock)

NSA ने पूर्व जर्मन विदेश मंत्री फ्रैंक-वाल्टर स्टीनमीयर और पूर्व जर्मन विपक्षी नेता पीर स्टीनब्रुक समेत स्वीडन, नॉर्वे, फ्रांस (France) और जर्मनी के वरिष्ठ अधिकारियों की जासूसी के लिए डेनिश यानि डेनमार्क की सूचना केबल का इस्तेमाल किया था.

वॉशिंगटन. जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल (Angela Merkel) समेत कई देशों के अधिकारियों की जासूसी का मुद्दा गरमाया हुआ है. इसी बीच डेनमार्क (Denmark) के सरकारी ब्रॉकास्टर डीआर ने दावा किया है कि अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी (NSA) ने डेनमार्क के विदेशी खूफिया इकाई की साझेदारी का इस्तेमाल कर जासूसी को अंजाम दिया है. कहा जा रहा है कि 2015 में हुई जांच के दौरान मिली जानकारियों से यह खुलासा हुआ है. संस्था ने 9 अज्ञात सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है.

जांच के मुताबिक, NSA ने पूर्व जर्मन विदेश मंत्री फ्रैंक-वाल्टर स्टीनमीयर और पूर्व जर्मन विपक्षी नेता पीर स्टीनब्रुक समेत स्वीडन, नॉर्वे, फ्रांस और जर्मनी के वरिष्ठ अधिकारियों की जासूसी के लिए डेनिश यानि डेनमार्क की सूचना केबल का इस्तेमाल किया था. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इसपर जर्मनी के चांसलर ऑफिस ने कहा है कि उन्हें इस बात की जानकारी तब लगी, जब उनसे पत्रकारों ने सवाल किए. उन्होंने आगे जानकारी देने से इनकार कर दिया.

यह भी पढ़ें: अमेरिका के अजब रेस्टोरेंट का गजब नियम, मास्क लगाया तो जुर्माना, फेंका तो डिस्काउंट!

इधर, वॉशिंगटन में NSA और नेशनल इंटेलीजेंस के निदेशक के कार्यालय (DNI) ने भी प्रतिक्रिया नहीं दी है. डेनमार्क की खूफिया सुरक्षा सेवा ने भी अब तक मामले पर कुछ नहीं कहा है. यह जांच 2012 से 2014 के बीच कवर की गई थी. डेनमार्क में स्वीडन, नॉर्वे, जर्मनी, हॉलैंड और ब्रिटेन से आने-जाने वाले कई सबसी इंटरनेट केबल के लैंडिंग स्टेशन मौजूद हैं.

रॉयटर्स के अनुसार, सूत्रों ने डीआर को बताया कि टार्गेटेड रिट्रीवल्स और NSA की तरफ से विकसित किए गए सॉफ्टवेयर की मदद से संस्था ने पड़ोसी देशों से कॉल, टेक्स्ट और चैट मैसेज इंटरसेप्ट किए थे. इस सॉफ्टवेयर को Xkeyscore नाम से जाना जाता है. डेनमार्क ने बीते साल कहा था कि वे व्हिसलब्लोअर रिपोर्ट से मिली जानकारी के आधार पर जांच शुरू करेंगे. अनुमान लगाए जा रहे हैं कि जांच इस साल तक पूरी हो सकती है.







[ad_2]

Source link

Live Sachcha Dost TV

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: