मनरेगा मज़दूरों के पास काम नहीं: धर्मपुर मनरेगा में रहा फिसड्‌डी,17 ग्राम पंचायतों में नहीं मिला एक दिन भी रोजगार


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सरकाघाट2 घंटे पहले

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प्रदेश सरकार जहां एक तरफ़ कोरोनाकाल में मनरेगा के तहत रोज़गार सृजन के लिए बड़ी बड़ी घोषणाएं कर रही है और बेरोजगारों को मनरेगा में रोज़गार देने की हररोज़ बातें कर रही है वहीं दूसरी तरफ सूबे के जलशक्ति मंत्री महेन्द्र सिंह ठाकुर के गृह क्षेत्र धर्मपुर विकास खण्ड में 70 प्रतिशत मनरेगा मज़दूरों को काम नहीं मिल सका हैंl

अभी तक मात्र तीस प्रतिशत मज़दूरों को ही काम दिया गया है l यहाँ तक कि 17 ग्राम पंचायतों में तो अभी तक एक दिन का रोज़गार भी नहीं मिला है।मनरेगा व निर्माण मज़दूर यूनियन के राज्य महासचिव व पूर्व ज़िला परिषद सदस्य भूपेंद्र सिंह ने तमाम आरोप लगाते कहा कि धर्मपुर खण्ड में 54 ग्राम पंचायतों में कुल 23528 जाबकार्ड धारक हैं जिनमें 27257 मज़दूर पंजीकृत हैं।लेकिन इस वित्त वर्ष में अभी तक कुल 11653 परिवारों को ही काम मिला है। इसप्रकार पंजीकृत जाबकार्डों में से तीस प्रतिशत को ही काम मिला है और 70 प्रतिशत से ज़्यादा को अभी तक कोई काम नहीं मिला है। मनरेगा क़ानून के तहत साल में 120 दिनों के काम की गारण्टी है और उस हिसाब से कुल 28.23 लाख कार्यदिवसों का काम एक वर्ष में मिलना चाहिए लेक़िन अभी तक मात्र 3 प्रतिशत से कम कार्यदिवसों का काम मिला है। उसमें भी सबसे ज्यादा चिंतित करने की बात ये है कि 17 ग्राम पंचायतों में अभी तक एक दिन का काम नहीं मिला है जिनमें ग्राम पंचायत बनेहरडी, बैरी, डरवाड़,,घरवासड़ा, गरयोह, जोढन, कमलाह, खनोउड़, कोठहुवां,लौंगनी, नेरी, पिपली-भराड़ी, सजाओपीपलु, समौड़, संधोल, ततोहली परडाना और तौरखोला पंचायतें हैं।

जून के प्रथम सप्ताह में सभी ग्राम पंचायतों में शुरू कराया जाए मनरेगा का काम: भूपेंद्र

भूपेंद्र सिंह ने खण्ड विकास अधिकारी धर्मपुर से मांग की है कि वे जून के प्रथम सप्ताह से सभी ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत काम शुरू करवाने के लिए पंचायतों को निर्देशित करें अन्यथा मनरेगा मज़दूर यूनियन को इसके लिए आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। वहीं उन्होंने इसके लिए वर्तमान सरकार के सबसे वरिष्ठ मन्त्री को भी जिम्मेदार ठहराया है जो अपने गृह क्षेत्र में मनरेगा योजना को सही तरीके से लागू नहीं करवा पा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में कोरोना के कारण बहुत से युवा बेेरोजगार भी घर पर हैं और वहीं दूसरी तरफ बढ़ती महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़ दी है तो इस वक्त सभी पंजीकृत मज़दूरों को काम दिया जाना चाहिए ताकि जनता को कुछ राहत मिल सके।

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