भारत-US के विदेश मंत्रियों की मुलाकात: अमेरिका ने कहा- कोरोना के शुरुआती दौर में भारत से मिली मदद को कभी भूल नहीं सकते

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3 मिनट पहले

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विदेश मंत्री एस जयशंकर अमेरिका के दौरे पर हैं। उन्होंने शुक्रवार को अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन से मुलाकात की थी। - Dainik Bhaskar

विदेश मंत्री एस जयशंकर अमेरिका के दौरे पर हैं। उन्होंने शुक्रवार को अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन से मुलाकात की थी।

कोरोना के समय में भारत से मिली मदद के लिए अमेरिका ने आभार जताया है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने शुक्रवार को कहा कि कोविड-19 के शुरुआती दौर में भारत ने जिस तरह से अमेरिका का साथ दिया उसे हम कभी भूल नहीं सकते। हम चाहते हैं कि इसी तरह हम भी अब भारत की मदद करें।

ब्लिंकेन ने यह बात अमेरिका दौरे पर गए भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात के दौरान कही। ब्लिंकेन ने कहा कि मौजूदा समय की कई अहम चुनौतियों से निपटने के लिए अमेरिका और भारत मिलकर काम कर रहे हैं। कोविड-19 का सामना करने के लिए भी हम एकजुट हैं। साथ ही कहा कि दोनों देशों की पार्टनरशिप मजबूत है और हमें लगता है कि इसके अच्छे नतीजे मिल रहे हैं।

उधर जयशंकर ने भी कोरोना के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका से मिली मदद और एकजुटता के लिए जो बाइडेन प्रशासन का आभार जताया है। जयशंकर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत के कई मुद्दे हैं। पिछले सालों में हमारे रिश्ते मजबूत हुए हैं और यह सिलसिला आगे भी जारी रहने का भरोसा है।

जयशंकर ने अमेरिका के डिफेंस सेक्रेटरी से भी मुलाकात की
ब्लिंकेन से मुलाकात से पहले जयशंकर ने शुक्रवार को ही अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलिवान और डिफेंस सेक्रेटरी लॉयड ऑस्टिन से भी मुलाकात की थी। ऑस्टिन और जयशंकर के बीच लंबी बातचीत हुई। इस दौरान दक्षिण एशिया और खासतौर पर अफगानिस्तान के मुद्दे पर फोकस रहा। हिंद और प्रशांत महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों पर भी विस्तार से बातचीत हुई।

चीन की बढ़ती गतिविधियों के लिहाज से जयशंकर का दौरा अहम
जनवरी में जो बाइडेन के राष्ट्रपति बनने के बाद भारत के किसी कैबिनेट मंत्री का यह पहला अमेरिका दौरा है। यह दौरा इस लिहाज से भी अहम है कि चीन हिंद और प्रशांत महासागर में अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है। जयशंकर और ऑस्टिन की मुलाकात के एक दिन पहले यानी गुरुवार को ही चीनी डिफेंस मिनिस्ट्री ने हिंद और प्रशांत महासागर में किसी बाहरी के ताकत के दखल को रोकने की मांग की थी। इसमें सीधे तौर पर अमेरिका का नाम लिया गया था।

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