मरीजाें काे वेटिंग: आईजीएमसी में वेंटिलेटर बेड दाे दिन से फुल, रेफर मरीजाें की बढ़ी मुश्किल

[ad_1]

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

शिमलाएक घंटा पहले

  • कॉपी लिंक
  • मरीजाें काे वेटिंग के लिए कहा जा रहा, डीडीयू को भी रेफर करने के लिए मना किया

आमताैर पर जब भी डीडीयू समेत किसी अस्पताल से काेराेना के गंभीर मरीजाें काे आईजीएमसी के लिए रेफर किया जाता है ताे संबंधित अस्पताल प्रबंधन आईजीएमसी प्रशासन से संपर्क करता है। वह यहां पर वेंटिलेटर बेड के बारे में पूछताछ करके यहां पर मरीजाें काे रेफर करता है ताकि मरीजाें काे आईजीएमसी में तुरंत बेड मिल जाए और उन्हें परेशान ना हाेना पड़े।

मगर बीते दाे दिनाें से आईजीएमसी में सभी वेंटिलेटर बेड फुल है जाे भी फाेन आईजीएमसी में वेंटिलेटर बेड के बारे में आ रहे हैं ताे यहां से प्रशासन इंकार कर रहा है और बेड खाली हाेने का तर्क दे रहा है। ऐसे में अब मरीजाें की मुश्किलें बढ़ गई है। अगर काे गंभीर मरीज वेंटिलेटर बेड की जरूरत पड़ती है ताे यहां पर एक भी बेड नहीं है।

अब तभी मरीजाें काे यहां पर बेड मिल पाएगा, जब यहां से वेंटिलेटर बेड से काेई मरीज डिस्चार्ज हाेगा और यहां पर बेड खाली हाेगा। कुछ मरीजाें की हालत ऑक्सीजन पर रखने के बाद भी काफी गंभीर हाे जाती है। उनका ऑक्सीजन लेवल लगातार कम हाेता रहता है।

मरीज सांस तक नहीं ले पाता ताे ऐसे में उसे वेंटिलेटर पर रखा जाता है ताे वहां पर मरीज काे सांस लेने में दिक्कत ना आए। वेंटिलेटर पर जाने के बार मरीज की हालत कई बार काफी तेजी से ठीक हाे जाती है। ऐसे में गंभीर मरीजाें काे डाॅक्टर वेंटिलेटर पर रखते हैं ताकि उन्हें आराम मिल सके।

दाे दिन से नहीं मिल रहा बेड

डीडीयू में एडमिट मरीज के तीमारदार वीरेंद्र कुमार ने बताया कि वीरवार काे डीडीयू में उनके मरीज की हालत गंभीर हाे गई थी। यहां से डाॅक्टराें ने उन्हें रेफर करने की बात कही। उन्हाेंने कहा कि जब डीडीयू के डाॅक्टराें ने आईजीएमसी में बात की और वेंटिलेटर बेड के बारे में पूछताछ की ताे वहां पर बेड खाली हाेने से मना कर दिया और कहा कि वह तभी बता पाएंगे जब यहां पर बेड खाली हाेंगे। उसके बाद ही डीडीयू से मरीज काे रेफर करें। शुक्रवार काे भी बेड खाली नहीं हाे पाया। जबकि मरीज की हालत लगातार खराब हाे रही है।

इसलिए भी आ रही दिक्कतें

​​​​शिमला शहर में आईजीएमसी के अलावा डीडीयू, छाेटा शिमला आयुर्वेदिक अस्पताल, वाॅकर अस्पताल काे भी काेराेना अस्पताल बनाया गया है। मगर यहां पर वेंटिलेटर बेड नहीं लगाए गए हैं। क्याेंकि वेंटिलेटर बेड चलाने के लिए स्टाॅफ की काफी जरूरत रहती है। इन अस्पतालाें में इतना स्टाॅफ नहीं है।

केवल आईजीएमसी में ही वेंटिलेटर बेड हैं, ऐसे में अब यदि वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है ताे मरीजाें के लिए परेशानी हाेना तय है। क्याेंकि आईजीएमसी में ही वेंटिलेटर के मरीजाें काे भेजा जा सकता है, अन्य अस्पतालाें में केवल उन मरीजाें काे रखा जा सकता है जिनकी हालत कुछ बेहतर हाे।

37 बेड पर आईजीएमसी में वेंटिलेटर

आईजीएमसी में कुल 305 बेड लगाए गए हैं। इसमें 37 वेंटिलेटर बेड वाले हैं अब यहां पर वेंटिलेटर बेड पूरे भर चुके हैं। ऐसे में अब यहां पर गंभीर मरीजाें काे वेंटिलेटर बेड नहीं मिलेंगे। जब यहां से वेंटिलेटर से मरीज डिस्चार्ज हाेंगे ताे ही दूसरे मरीजाें काे बेड मिल जाएंगे। क्याेंकि जाे मरीज वेंटिलेटर पर हाेते हैं उन्हें ना ताे हटाया जा सकता है और ना ही उन्हें कहीं शिफ्ट किया जाता है। केवल मरीज के ठीक हाेने या भी मृत्यु हाेने पर ही बेड से हटाया जा सकता है।

आईजीएमसी में वेंटिलेटर बेड भर चुके हैं। अगर यहां पर काेई बेड खाली हाेता है ताे तुरंत वह भर जाता है क्याेंकि यहां पर प्रदेशभर से वेंटिलेटर के लिए मरीजाें काे रेफर किया जा रहा है। डीडीयू अस्पताल प्रबंधन भी जानकारी लेकर ही मरीजाें काे रेफर करता है। हालांकि काेशिश की जा रही है कि यहां पर कुछ ओर बेड बढ़ाए जाएं, ताकि गंभीर मरीजाें काे ज्यादा से ज्यादा सुविधा मिल सके।
डाॅ. राहुल गुप्ता प्रशासनिक अधिकारी, स्टाेर इंचार्ज आईजीएमसी शिमला

खबरें और भी हैं…

[ad_2]

Source link

Live Sachcha Dost TV

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: