ब्लैक फंगस के भर्ती 96 प्रतिशत मरीजों में मिल रहा डायबिटीज, पटना के 3 बड़े अस्पतालों में ये है हाल

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ब्लैक फंगस के लगभग 96 प्रतशित मरीजों में डायबिटीज की बीमारी भी पाई जा रही है। पटना के अस्पतालों में भर्ती 166 मरीजों में से सिर्फ आठ ऐसे मरीज हैं, जिनमें डायबिटीज नहीं पायी गयी है। बाकी 158 ऐसे मरीज हैं, जो डायबिटीज के साथ कोरोना से भी ग्रसित थे। एम्स पटना में गुरुवार की शाम तक 72 कोरोना संक्रमित भर्ती थे। 

कोरोना के नोडल पदाधिकारी डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि इनमें चार ऐेसे मरीज हैं, जिनको डायबिटीज नहीं है। उन्होंने बताया ब्लैक फंगस म्यूककरमाइकोसिस से पीड़ित इक्के-दुक्के लोग ही ऐसे हैं जो डायबिटीज पीड़ित नहीं हैं। ऐसे लोग लंबे समय तक कोरोना संक्रमित रहने, स्टेरायड और ऑक्सीजन का इस्तेमाल करने से ब्लैक फंगस के शिकार हो गए हैं। ग्रामीण इलाके के कुछ लोग डायबिटीज से पीड़ित नहीं होने के बावजूद ब्लैक फंगस से संक्रमित हैं। ऑक्सीजन लेने में बरती गई असावधानी भी इसका कारण हो सकता है।

वहीं आईजीआईएमएस के नेत्र रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. विभूति प्रसन्न सिन्हा ने बताया कि आईजीआईएमएस में पहले दिन भर्ती किए गए 43 मरीजों में से 42 में डायबिटीज पाया गया। अभी वहां 88 भर्ती संक्रमितों में मात्र चार ऐसे हैं जो डायबिटीज पीड़ित नहीं हैं। गुरुवार को ओपीडी में आए 10 संदिग्ध में से सभी डायबिटीज से पीड़त हैं। इनमें ब्लैक जैसे लक्षण मिलने के कारण जांच के लिए भर्ती किया गया है। वहीं पीएमसीएच में भर्ती सभी छह मरीजों को डायबिटीज है।

अनियंत्रित डायबिटीज भी ब्लैक फंगस का बड़ा कारण
कोरोना पीड़ितों में अनियंत्रित डायबिटीज भी ब्लैक फंगस का बड़ा कारण है। आईजीआईएमएस के डॉ. विभूति प्रसन्न सिन्हा ने बताया कि अस्पताल में भर्ती होनेवाले अधिकांश मरीज ऐसे हैं जिनका शुगर का स्तर अनियंत्रित था। कई ऐसे लोग भी हैं जो सुबह में खुद से शुगर लेबल जांच कर संतुष्ट हो जाते थे। लेकिन पूरे दिन के खाने-पीने के बाद शुगर का स्तर पता नहीं कर पाए थे। ऐसे लोग भी बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि डायबिटीज पीड़ित कोरोना संक्रमितों को पूरी कड़ाई से अपने शुगर लेबल को नियंत्रित रखना चाहिए।

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