चंद्रपुर से शराबबंदी हटने पर: कैबिनेट मंत्री वडेट्टीवार का अजीब तर्ज, कहा- शराबबंदी की वजह से अवैध दारू की बिक्री बढ़ी, महिलाएं और बच्चे तक इसकी बिक्री के गैरकानूनी व्यवसाय में लग गए थे

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मुंबईएक मिनट पहलेलेखक: विनोद यादव

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महाराष्ट्र सरकार में राहत व पुनर्वसन मंत्री वडेट्टीवार चंद्रपुर जिले के प्रभारी मंत्री भी हैं। - Dainik Bhaskar

महाराष्ट्र सरकार में राहत व पुनर्वसन मंत्री वडेट्टीवार चंद्रपुर जिले के प्रभारी मंत्री भी हैं।

महाराष्ट्र सरकार ने आदिवासी बहुल चंद्रपुर जिले में करीब छह वर्षों से लागू शराबबंदी को हटाने का महत्वपूर्ण निर्णय गुरुवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में लिया है। अब शराबबंदी हटाए जाने के राज्य सरकार के निर्णय के समर्थन में कैबिनेट मंत्री विजय वडेट्‌टीवार चौंकाने वाला तर्क देकर सुर्खियों में आ गए हैं। महाराष्ट्र सरकार में राहत व पुनर्वसन मंत्री वडेट्टीवार चंद्रपुर जिले के प्रभारी मंत्री भी हैं। उन्होंने कहा, “शराबबंदी लागू होने की वजह से चंद्रपुर जिले में बड़े पैमाने पर अवैध शराब की बिक्री बढ़ गई थी। युवाओं के साथ-साथ बड़ी संख्या में जिले के लोग इन अवैध शराब का सेवन करने लगे थे। यहां तक की महिलाएं और बच्चे तक अवैध दारू की बिक्री के व्यवसाय में लग गए थे। जिसकी वजह से चंद्रपुर जिले में आपराधिक घटनाओं में वृद्धि हो रही थी। इस संबंध में राज्य सरकार ने जिस समिति का गठन किया था। उसकी रिपोर्ट के आधार पर शराबबंदी हटाने का निर्णय लिया गया है।”

साल 2015 से चल रही थी शराब बंदी
गौरतलब है कि सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. अभय बंग सहित कई लोगों की मांग के बाद अप्रैल 2015 से विदर्भ के चंद्रपुर जिले में शराबबंदी लागू थी। अब वहां से शराबबंदी हटाये जाने के निर्णय पर राज्य सरकार की ओर से दलील दी जा रही है कि चंद्रपुर जिले में शराबबंदी लागू करने से सरकार को 2,570 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ है। राज्य सरकार को पिछले पांच वर्षों में 1,606 करोड़ रुपए के उत्पादन शुल्क और 964 करोड़ रुपए के बिक्रीकर से हाथ थोना पड़ा है।

इसके अलावा चंद्रपुर में शराबबंदी से पहले साल भर में कितनी आपराधिक घटनाएं होती थीं और शराबबंदी के बाद वहां किस तरह से आपराधिक घटनाएं बढ़ गईं। इसका भी आंकड़ा जारी कर राज्य सरकार की ओर से चंद्रपुर में शराबबंदी हटाए जाने का समर्थन किया जा रहा है।

शराबबंदी हटाने का निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण : फडणवीस
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और पूर्व वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने चंद्रपुर जिले से शराबबंदी हटाए जाने के निर्णय को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। फडणवीस ने कहा कि इस निर्णय का दूरगाामी परिणाम होगा। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के संकट के वक्त राज्य के स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पर ध्यान देने के बदले महाविकास आघाडी सरकार की प्राथमिकता क्या है?

उन्होंने आगे कहा कि इस निर्णय से स्पष्ट हो गया है। मुनगंटीवार ने महाविकास आघाड़ी सरकार में शामिल कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि शराबबंदी हटाए जाने के फैसले से एक बार फिर से साबित हो गया है कि कांग्रेस अब पहले की तरह महात्मा गांधी के सिद्धांत पर चलने वाली पार्टी नहीं रही।

महाराष्ट्र सरकार के निर्णय में विरोधाभाष
चंद्रपुर जिले में शराबबंदी को लेकर वहां के लोगों की क्या राय है? इसका पता लगाने और लोगों की राय जानकर रिपोर्ट देने के लिए 12 जनवरी 2021 को पूर्व प्रधान सचिव रमानाथ झा की अध्यक्षता में 13 लोगों की एक समिति का गठन किया गया था। बताया जा रहा है कि चंद्रपूर जिले के करीब ढाई लाख से अधिक लोगों ने शराबबंदी हटाए जाने के पक्ष में और 30 हजार लोगों ने शराबबंदी जारी रखने के पक्ष में समिति के समक्ष अपनी राज दी थी।

चंद्रपुर जिले से शराबबंदी हटाए जाने का निर्णय लेते वक्त वहां के लोगों की इस राय को भी एक प्रमुख वजह बताई जा रही है। जबकि शराबबंदी जारी रखने की राय रखने वालों का कहना है कि राज्य सरकार का शराबबंदी हटाने का निर्णय विरोधाभाषी है। क्योंकि महाराष्ट्र में यह कानून है कि यदि किसी गांव के कुल 50 फीसदी पौढ़ लोग या 50 फीसदी महिलाएं शराब की दुकान बंद करने के पक्ष में अपनी राय देती हैं, तो वहां शराबबंदी लागू की जाती है।

12 लाख लोग की मंजूरी के बिना नहीं हटनी चाहिए थी शराबबंदी
चंद्रपुर जिले की जनसंख्या करीब 24 लाख है। लिहाजा इस नियम के अनुसार चंद्रपुर जिले के जब तक 12 लाख लोग शराबबंदी हटाने के पक्ष में अपनी राय नहीं देते तब तक शराबबंदी नहीं हटाई जानी चाहिए थी। क्योंकि राज्य सरकार ने चंद्रपुर जिले की सिर्फ 11 फीसदी जनता की राय के आधार पर शराबबंदी हटाने का निर्णय लिया है।

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