चक्रवात यास: बिहार में दो-तीन तक होगी बारिश, बनेगी बाढ़ जैसी स्थिति, NDRF और SDRF की 22 टीमें तैयार

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बंगाल की खाड़ी में उठा तूफान यास झारखंड होते हुए बिहार पहुंचेगा। इसे लेकर मौसम विज्ञान केंद्र पटना के निदेशक विवेक सिन्हा ने अभी-अभी बातचीत में बताया है कि यास तूफान से बिहार के लिए चिंता की एकमात्र वजह दो-तीन दिन तक होने वाली बारिश है। इससे जगह-जगह जलजमाव या बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है। सूबे के जनजीवन पर इसका सामान्य असर हो सकता है।

उन्होंने बताया कि बारिश दो-तीन दिन तक राज्य भर में होगी लेकिन एक दिन में राज्य के कई जिलों में अतिभारी बारिश की संभावना न के बराबर है। सूबे में अगले दो-तीन दिन हवा की रफ्तार 30 किमी प्रति घंटे से ज्यादा नहीं रहेगी। दो-तीन दिन की बारिश में इसकी तीव्रता भी ज्यादा नहीं रहेगी। हां 72 घंटे की बारिश से इसकी मात्रा ज्यादा हो सकती है।

वज्रपात की आंशका भी अब पहले से कम हो गई है। वज्रपात होगा लेकिन इसका प्रभाव पहले से कम रहेगा। चूंकि बिहार से तटीय इलाका 500 किमी दूर है इसलिए यहां आते-आते तूफान का प्रभाव काफी हद तक कमजोर हो जाएगा। तूफान का झारखंड की ओर से प्रवेश होगा। इस वजह से झारखंड की सीमा से सटे बिहार के सभी जिलों में हवा की रफ्तार थोड़ी तेज रह सकती है लेकिन यह भी 40 किमी प्रतिघंटे से ज्यादा नहीं होगी।

पटना में लोगों को इस बात के लिए बहुत चिंतित होने की जरूरत नहीं है। यहां भारी बारिश के आसार कम हैं। अगले तीन दिन बारिश होगी लेकिन एक दिन में 100 मिलिमीटर बारिश हो जाए ऐसा नहीं होगा। तूफान का प्रभाव कुछ देर में जमशेदपुर और रांची की ओर दिखेगा। इसके बाद बिहार में इसके प्रवेश को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी।

यास चक्रवात ताजा अपडेट
फिलहाल मौसम विभाग दिल्ली की ओर से चक्रवात को लेकर बिहार के बारे में कोई खास अलर्ट नहीं है। विशेष अलर्ट बंगाल, ओडिशा और झारखंड को लेकर है। कल यानी 27 मई से इसका बिहार में विशेष असर दिखाई देगा।

एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की 22 टीमें तैयार
यास तूफान को देखते हुए आपदा विभाग ने एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को तैयार कर लिया है। तूफान के दौरान जिलों में राहत बचाव की जरूरत पड़ी, तो इसके लिये एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की 22 टीमों को तैयार रखा गया है। जहां पर तूफान का असर सबसे अधिक होगा वहां इन टीमों को तत्काल भेजा जाएगा। विभाग को बुधवार को टारगेट प्वाइंट और ज्यादा प्रभावित होने वाले जिलों का नाम मौसम विज्ञान केंद्र आपदा प्रबंधन विभाग को देगा। इसके बाद विभाग टीमों को उक्त लोकेशन में भेज देगी, ताकि राहत बचाव कार्य में कोई परेशानी नहीं हो।

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