स्टडी में खुलासा: कहानियां सुनाने पर अस्पताल में भर्ती बच्चों की सेहत में जल्दी सुधार होता है, उनके दर्द और बेचैनी में भी कमी आती है

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लंदन11 मिनट पहले

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स्टडी के तहत आईसीयू में भर्ती 2-7 साल के उम्र के बच्चों को कहानियां सुनाई गईं और पहेलियां हल करने को दी गईं। - Dainik Bhaskar

स्टडी के तहत आईसीयू में भर्ती 2-7 साल के उम्र के बच्चों को कहानियां सुनाई गईं और पहेलियां हल करने को दी गईं।

  • ब्राजील में आईसीयू में भर्ती बच्चों पर कहानियों और पहेलियों का दिखा सकारात्मक असर

बच्चों पर कहानियां जादू की तरह असर करती हैं, यह तो सभी जानते हैं पर बच्चों को गंभीर बीमारी से उबरने और उनके दर्द को कम करने में भी कहानियां बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। ब्राजील में हुई स्टडी में यह दावा किया गया है।

स्टडी के तहत आईसीयू में भर्ती 2-7 साल के उम्र के बच्चों को कहानियां सुनाई गईं और पहेलियां हल करने को दी गईं। नतीजे चौंकाने वाले थे। इस दौरान बच्चों के शरीर में कॉर्टिसोल का स्तर कम हुआ और ऑक्सीटोसिन हार्मोन में बढ़ोतरी हुई। बच्चों में बेचैनी और दर्द भी पहले की तुलना में कम हुआ।

इसके अलावा समूह में कहानी सुनाने पर बच्चों में जो नतीजे देखने को मिले वो दोगुने बेहतर थे। बीमारी से पीड़ित बच्चों का ऑक्सीटोसिन का स्तर 6 गुना बढ़ गया था, जबकि उनके दर्द का स्कोर पांच गुना तक घट गया था।

ब्राजील के डी’ऑर इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एंड एजुकेशन ने यह स्टडी करवाई थी। इसके तहत अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और निमोनिया जैसी बीमारियों के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती 81 बच्चों को शामिल किया गया था।

स्टडी के प्रमुख लेखक गुइलहर्मे ब्रॉकिंगटन ने प्रोसिडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज जर्नल में बताया कि ‘कहानी सुनाने के दौरान, बच्चों के मन-मस्तिष्क में कुछ होता है, जिससे वे बेहतर अनुभव करते हैं। बच्चे कल्पनाओं के जरिए ऐसी संवेदनाओं और विचारों का अनुभव करते हैं, जो उन्हें एक अलग दुनिया में ले जाते हैं। जो अस्पताल के कमरे और विषम परिस्थितियों से कहीं दूर है।

स्टडी के दौरान बच्चों को यह विकल्प चुनने का मौका दिया गया था कि उन्हें कौन सी कहानी सुनाई जाएगी और वे कौन सी पहेली सुलझाएंगे। बच्चों के आधे समूह को कहानियां सुनाई गई, बाकी बचे समूह को पहेलियां हल करने के लिए दी गई। इस सेशन से पहले और बाद में बच्चों का सलाइवा (लार) लेकर उनके शरीर में कॉर्टिसोल (तनाव संबंधी हॉर्मोन) और ऑक्सीटोसिन हॉर्मोन (भावनाओँ से जुड़ा) के स्तर का विश्लेषण किया गया।

भविष्य में इसे पब्लिक हेल्थ सिस्टम में लागू किया जा सकता है: शोधकर्ता

स्टडी का नेतृत्व कर रहे जॉर्ज मोल कहते हैं, बच्चों को लेकर काफी अध्ययन हुए हैं, पर यह सबसे अलग है, इसलिए मैं इसे महत्वपूर्ण मानता हूं। अस्पताल के जटिल माहौल का प्रभाव और उस दौरान इंसान का दर्द दवाई के साथ-साथ किसी और चीज से कम हो जाना अपने आप में हैरानी वाली बात है।

चूंकि यह बहुत कम लागत वाला और सुरक्षित उपाय है, इसलिए इसे भविष्य में पब्लिक हेल्थ सिस्टम में लागू किया जा सकता है। इसका कोई नुकसान भी नहीं है। हम जल्द ही इसकी उपयोगिता ज्यादा साबित करने के लिए बड़े स्तर पर यह स्टडी करवाएंगे।

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