पत्रकार की गिरफ्तारी के लिए बड़ा ड्रामा: बम की अफवाह फैलाई, फाइटर जेट भेज लैंड कराया विमान; बेलारूस के राष्ट्रपति के आदेश पर रचा ड्रामा

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2 मिनट पहले

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रोमन बेलारूस की स्टेट यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता के छात्र थे। लेकिन सरकार की आलोचना के बाद उन्हें यूनिवर्सिटी से निष्कासित कर दिया गया। - Dainik Bhaskar

रोमन बेलारूस की स्टेट यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता के छात्र थे। लेकिन सरकार की आलोचना के बाद उन्हें यूनिवर्सिटी से निष्कासित कर दिया गया।

  • 26 वर्षीय रोमन बेलारूस सरकार के आलोचक हैं, वे विमान से ग्रीस से लिथुआनिया जा रहे थे

एंटोन ट्रॉयनोव्स्की और इवान नेचेपुरेंको पत्रकार को गिरफ्तार करने के लिए पहले विमान में बम की अफवाह फैलाई गई। फिर फाइटर जेट मिग-29 भेजकर विमान को जबरन लैंड कराया गया। इसके बाद सेना के 60 जवान भेजकर एक पत्रकार को गिरफ्तार किया गया। वो भी सिर्फ इसलिए, क्योंकि वह सरकार का सबसे बड़ा आलोचक है। यह किसी फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि सच्ची घटना है, जो रविवार को बेलारूस में घटी। और यह पूरा ड्रामा रचा था बेलारूस के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर लुकाशेंको ने।

दरअसल, 26 वर्षीय रोमन दिमित्रियेविच प्रोत्साविक राजनीतिक पत्रकार हैं। वह बेलारूस के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर लुकाशेंको के कट्‌टर आलोचक माने जाते हैं। रविवार को उन्हें उस वक्त गिरफ्तार किया गया, जब वो ग्रीस से लिथुआनिया जा रहे थे। इस दौरान उनके विमान को जबरन बेलारूस के मिंस्क एयरपोर्ट पर उतारा गया और उन्हें गिरफ्तार किया गया।

जानकार बताते हैं कि रोमन ने राष्ट्रपति का विरोध करने के लिए एक सोशल नेटवर्किंग ग्रुप भी बनाया था, जिसे सरकार के आदेश पर 2012 में हैक कर लिया गया। तब रोमन बेलारूस की स्टेट यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता के छात्र थे। लेकिन सरकार की आलोचना के बाद उन्हें यूनिवर्सिटी से निष्कासित कर दिया गया। उन पर दंगा भड़काने और देशद्रोह जैसे आरोप लगे। हालांकि कोर्ट ने उन्हें तमाम अपराधों से बरी कर दिया था।

इसके बाद रोमन 2019 पोलैंड चले गए। जनवरी 2020 में पोलैंड में से राजनीतिक शरण मांगी। फिर वहां नेक्स्टा नाम का यूट्यूब चैनल चलाने लगे। यह चैनल बेलारूस विरोधी खबरें दिखाता है। पिछले साल इस चैनल ने बेलारूस के राष्ट्रपति के खिलाफ काफी खबरें दिखाई थीं। जिसके बाद बेलारूस की सरकार ने रोमन के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज किए थे। फिर उन्हें आतंकी बताते हुए मौत की सजा सुना दी।

ईयू, ब्रिटेन और अमेरिका ने निंदा की, कहा- पत्रकार को रिहा करें

पत्रकार की गिरफ्तारी को लेकर यूरोपियन संघ, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका ने बेलारूस की आलोचना की है। जर्मनी के विदेश मंत्री हाइको मास ने इस घटना को ‘हाईजैक’ करार दिया। उन्होंने कहा- बम की अफवाह फैला कर किसी को ऐसे गिरफ्तार करना गंभीर कदम है। यूरोपीय यूनियन और फ्रांसीसी सरकार ने बेलारूस से सफाई मांगी है। वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री एंटी ब्लिंकेन ने प्रोत्साविक को तुरंत रिहा करने की मांग की।

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