व्यापारियों का आरोप: स्मार्ट सिटी में बन रही प्री फैब्रिकेटेड दुकानों में इस्तेमाल की जा ही घटिया निर्माण सामग्री


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शिमलाएक घंटा पहले

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  • अब व्यापारी नगर निगम काे नहीं देंगे अपनी दुकानें

शहर में स्मार्ट सिटी के तहत बनने वाली प्री फैब्रिकेटेड दुकानाें काे लेकर विवाद हाे गया है। नगर निगम की ओर से काराेबारियाें काे जिन दुकानाें काे खाली करने के नाेटिस जारी किए थे, अब उन्हें काराेबारी निगम काे नहीं देंगे। व्यापार मंडल शिमला ने निर्णय लिया है कि वे अपनी दुकानाें काे स्मार्ट सिटी के तहत नहीं बनाना चाहते हैं। इसलिए वे दुकानाें की चाबियां नगर निगम काे नहीं देंगे।

ऐसे में शिमला शहर काे स्मार्ट बनाने के निगम के फैसले काे तगड़ा झटका लगा है। व्यापार मंडल ने स्मार्ट सिटी के तहत बनने वाली प्री फैब्रिकेटेड दुकानाें पर सवाल उठाए हैं। आराेप हैं कि इसमें घटिया सामग्री लगाई जा रही है और पैसाें का दुरुपयाेग काे रहा है। अभी तीन ही दुकानें लाेअर बाजार में बनी है। ऐसे में इसका काम नाै महीने में पूरा हुआ है।

इतने लंबें अंतराल के कारण काराेबारी पूरी तरह से प्रभावित हाे रहे हैं। पहले हिमुडा दुकानें बना रहा था, अब नगर निगम दुकानें बना रहा है। कभी ऊंचाई ज्यादा हाेने पर दुकानें उखाड़ दी जाती है ताे कभी डिजाइन अच्छा न हाेने का बहाना बनाया जा रहा है। इस कारण जनता के पैसाेें की बर्बादी हाे रही है।

शिमला की सब्जी मंडी और लोअर बाजार में स्मार्ट सिटी के तहत दुकानाें काे नए सिरे से बनाने का प्लान है। इस पर 120 करोड़ रुपए खर्च होंगे। चरणबद्ध तरीके से दुकानों को तोड़ा जाएगा। हिमुडा ने बाजारों में स्थित निगम की 132 दुकानों के टेंडर किए। इन दुकानों के डिजाइन फाइनल कर दिए गए। जबकि अभी तक सिर्फ तीन ही दुकानें बनाई गई है, उस पर भी कई तरह की आपत्तियां लगी हंै। शहर में निगम की 927 दुकानें हैं। इन सभी दुकानों को शिफ्ट करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

नाै महीने में सिर्फ तीन ही दुकानें बनाई, 467 बननी है प्रस्तावित

ये सवाल उठा रहे है काराेबारी

काराेबारियाें का कहना है कि सब्जी मंडी, लाेअर बाजार में जिस जगह यह दुकानें बन रही हैं, उस सड़क के दूसरी ओर उनकी दुकानें और रिहायशी मकान हैं। पहले यहां छोटी-छोटी दुकानें थी, लेकिन नगर निगम अब स्मार्ट सिटी के तहत दो मंजिला दुकानें बना रहा है।

इससे उनके रिहायशी मकानों और दुकानों की धूप तक रुक गई है। यहां कई बुजुर्ग भी रहते हैं जो ज्यादा ऊंचाई वाली नई दुकानें बनने से परेशान हैं। एनजीटी ने कोर एरिया में सिर्फ ओल्ड लाइन पर निर्माण की अनुमति दी है, लेकिन यहां उसके उल्ट काम हो रहा है।

जैसी जरूरत, वैसी दुकान बनाएंगे, अब उलट हाे रहा

नगर निगम की ओर से कहा गया था कि सब्जी, करियाना शॉप और ढाबे के अंदर का डिजाइन अलग-अलग रहेगा। ताकि कारोबारियों को सामान रखने या बेचने में परेशानी न हो। कारोबारी बताएंगे कि दुकान के भीतर उन्हें किस तरह के रैक या अलमारियां चाहिए। जबकि अब काराेबारियाें काे पूछा ही नहीं जा रहा है।

बनाई जानी हैं 467 नई दुकानें

शहर में 467 दुकानों को तोड़कर इनकी जगह प्री फैब तकनीक से नई दुकानें बनाई जानी हैं। सब्जी मंडी और लोअर बाजार में काम शुरू ताे हुआ है, लेकिन नाै महीने में तीन ही दुकानें बना पाए हैं। इन्हीं बाजारों में सबसे ज्यादा नई दुकानें बननी हैं। इसके बाद गंज और राम बाजार में भी निगम पुरानी दुकानों की जगह नई दुकानें बनाएगा।

इसका पैसा स्मार्ट सिटी से जारी किया जाएगा। हालांकि दुकानों के निर्माण और इसके नक्शे को लेकर भी निगम पर सवाल उठ चुके हैं। हिमुडा जो दुकानें बना रहा है वह पुरानी दुकानों से काफी ऊंची है, अब हिमुडा के बाद नगर निगम काे दुकानें बनाने का काम दिया गया है।

हमने स्मार्ट सिटी के तहत बनने वाली दुकानाें काे लेने से इनकार कर दिया है। हम दुकानाें की चाबियां नगर निगम काे नहीं देंगे। हमने साफ कर दिया है कि काम सही से नहीं हाे रहा है। जनता के पैसाें की बर्बादी नहीं सहन की जाएगी। घटिया क्वालिटी से दुकानें बनाई जा रही है। दुकानें बनाने के लिए काफी समय लगाया जा रहा है। हम सब इस मामले में एकजुट हैं।

इंद्रजीत सिंह, अध्यक्ष व्यापार मंडल शिमला

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