नदी के ऊपर पार्क: न्यूयॉर्क में सड़क से 60 मीटर दूर हडसन नदी के ऊपर बना पार्क लोगों के लिए खुला

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5 मिनट पहले

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पार्क को हरा-भरा रखने के लिए यहां 350 प्रजातियों के पौधे, 65 प्रजातियों की घास और 50 प्रजातियों की झाड़ियां लगाई गई हैं। यहां खेल का एक मैदान और 687 सीटों वाला ओपन थिएटर भी है। - Dainik Bhaskar

पार्क को हरा-भरा रखने के लिए यहां 350 प्रजातियों के पौधे, 65 प्रजातियों की घास और 50 प्रजातियों की झाड़ियां लगाई गई हैं। यहां खेल का एक मैदान और 687 सीटों वाला ओपन थिएटर भी है।

  • यहां खेल का एक मैदान और 687 सीटों वाला ओपन थिएटर भी है।

जेम्स टार्मी | अमेरिका के न्यूयॉर्क में हडसन नदी के ऊपर बना पार्क शुक्रवार को लोगों के लिए खोल दिया गया। यह 2.4 एकड़ में फैला है। इसे लिटिल आइलैंड नाम दिया गया है, क्योंकि यह सड़क से करीब 60 मीटर दूर नदी के ऊपर बना है। यह पार्क ट्यूलिप के फूल जैसे कंक्रीट के 132 खंभों पर बना है।

पार्क को हरा-भरा रखने के लिए यहां 350 प्रजातियों के पौधे, 65 प्रजातियों की घास और 50 प्रजातियों की झाड़ियां लगाई गई हैं। यहां खेल का एक मैदान और 687 सीटों वाला ओपन थिएटर भी है। खास बात यह है कि इसे सरकार या स्थानीय प्रशासन ने नहीं, बल्कि 71 वर्षीय अमेरिकी अरबपति बैरी डिलर ने बनवाया है। इसकी नींव 2013 में रखी गई थी। इसके निर्माण पर करीब 1900 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। बैरी डिलर का कहना है कि कोरोना काल में जिस तरह लोग मानसिक रूप से परेशान हैं, उनके लिए यह पार्क संजीवनी का काम करेगा।

विरोधी नहीं चाहते थे कि पार्क बने, 7 साल कोर्ट में चला मामला

पार्क को लेकर बैरी डिलर ने कहा- ‘न्यूयॉर्क में कुछ भी संघर्ष के बिना नहीं बनता। लिटिल आइलैंड बनाने के लिए कोर्ट में 7 साल तक लड़ाई लड़नी पड़ी। कुछ विरोधी नहीं चाहते थे कि यह पार्क बने, क्योंकि लिटिल आइलैंड उस जगह बना है, जहां पियर-54 जहाज खड़ा होता था। पियर-54 वही जहाज है, जो 1912 में टाइटैनिक हादसे में बचे लोगों को लेकर आया था।’

  • 1900 करोड़ रुपए खर्च हुए इसके निर्माण में, 2.4 एकड़ में फैला है पार्क
  • 687 सीटों वाला थिएटर और खेल का एक मैदान भी है
  • 350 प्रजातियों के पौधे और 65 प्रजातियों की घास लगाई गई है यहां
  • 132 ट्यूलिप जैसे खंभों पर बना है पार्क, एक पिलर का वजन 73 टन
  • 66 हजार बल्ब लगाए गए हैं, लोगों के लिए बड़ी-बड़ी बेंचें भी रखी गई हैं यहां।
  • 07 साल में बनकर तैयार हुआ, 2013 में निमार्ण कार्य शुरू हुआ था।

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