मानवता सबसे बड़ा धर्म: ऑगस्टिन अपना घर बनाने के लिए लाए लाखों रुपए की लकड़ी, लेकिन अब कनलोग श्मशानघाट को कर दी दान

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शिमलाएक घंटा पहलेलेखक: जोगेंद्र शर्मा

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सेबेस्टियन कहते हैं कि शहर में काेई भूखा न रहे हैं, यही हमारी काेशिश हाेती है। मुसीबत के समय हम चाहते हैं कि हर किसी के काम आए। - Dainik Bhaskar

सेबेस्टियन कहते हैं कि शहर में काेई भूखा न रहे हैं, यही हमारी काेशिश हाेती है। मुसीबत के समय हम चाहते हैं कि हर किसी के काम आए।

  • बोले इंसानियत सबसे बड़ी, लकड़ी की कमी नहीं होनी चाहिए, इसलिए दान कर दी

मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है। इंसान सुख दुख में एक दूसरे की मदद के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। मानवता की ये मिसाल शिमला के कल्सटन में रहने वाले ऑगस्टिन सेबेस्टियन नाम के व्यक्ति ने कायम की है। ये खुद ताे ईसाई धर्म से संबंध रखते हैं, लेेकिन हिंदू रीति-रिवाज से दाह संस्कार करने के लिए इन दिनाें ये लाखाें रुपए की कायल की लकड़ी कनलाेग श्मशान घाट काे दान कर रहे हैं।

इन्हाेंने वुडन वर्क से अपना घर सजाने के लिए बड़ी मात्रा में लकड़ी खरीदी थी। इसी बीच इन्हें पता लगा कि कोरोना संक्रमितों की पार्थिव देह का संस्कार करने के लिए लकड़ी की जरूरत है। उन्हाेंने अपनी पत्नी के साथ मिलकर घर के लिए खरीदी लकड़ी कनलोग श्मशानघाट को दान कर रहे हैं।

खास बात ये है कि हर राेज पिकअप में लादकर ये लकड़ियां श्मशानघाट पहुंचा रहे हैं। शिमला के आईजीएमसी अस्पताल में कार्यरत नर्सिंग सुपरिंटेंडेंड सुकीर्ति ओर उनके पति ऑगस्टिन सेबेस्टियन दाेनाें हेल्थ डिपार्टमेेंट से संबंध रखते हैं। हाल ही में सेबेस्टियन हेल्थ सुपरवाइजर के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। ऐसे में तब से लेकर अब तक इनका लाेगाें से सीधा जुड़ाव है।

भास्कर से बात करते हुए ऑगस्टिन सेबेस्टियन ने कहा कि इंसान ही सबसे बड़ा धर्म हैं। मैंने अपनी नाैकरी के दाैरान गांव में देखा कि किस तरह से हिंदू धर्म में लाेग शवाें काे जलाने के लिए अपने घराें से लकड़ी दान करते हैं। मुझे भी लगा कि इस समय मानवता की सेवा करनी चाहिए। सेवा किसी भी तरीके से की जा सकती हैं।

मैंने घर के लिए लकड़ी लाई थी, लेकिन इसकी अभी सबसे ज्यादा जरूरत उन परिवाराें काे है, जिन्हाेंने अपने लाेग खाेए हैं। इसलिए इन लकड़ियाें काे मैंने दान किया। हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सबका धर्म मानवता हैं। हम सभी काे अपने कर्तव्याें का पालन करना चाहिए। जरूरतमंदाें की मदद के लिए आगे आने की जरूरत है।

घर काे सजाने के लिए खरीदी थी लकड़ी

ऑगस्टिन सेबेस्टियन ने अपने घर को सजाने के लिए लकड़ी खरीदी थी। कुछ लाेगाें ने इन्हें बताया कि काेराेना संक्रमिताें के शवाें काे जलाने के लिए लकड़ी की कमी हाे रही है। ऐसे में फैसला लिया कि वह अपनी खरीदी हुई सारी लकड़ी कनलोग श्मशानघाट को दान में दे देंगे। हालांकि, यह दंपति क्रिश्चियन परिवार से हैं, जब उन्होंने शमशानघाट में लकड़ी की कमी देखी तो अपने घर की लकड़ी दान कर एक मानवता की मिसाल पेश की है।

हर मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं

ऑगस्टिन सेबेस्टियन और उनकी पत्नी सुर्कीर्ति हर समय लाेगाें की मदद के लिए तैयार रहते हैं। इससे पहले भी इन्हाेंने जरूरतमंदाें की मदद के लिए अपनी एनजीओ के जरिए बेहतर प्रयास किए थे। ये कहते हैं कि शहर में काेई भूखा न रहे हैं, यही हमारी काेशिश हाेती है। मुसीबत के समय हम चाहते हैं कि हर किसी के काम आए। ताकि, संकट की इस घड़ी में काेई अपने काे अकेला न समझे।

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