समुद्र में रेस्क्यू ऑपरेशन का पांचवा दिन: 51 शव अब तक हुए बरामद, 22 की तलाश आज भी है जारी; बार्ज के कैप्टन समेत कइयों पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज

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मुंबई7 मिनट पहलेलेखक: विनोद यादव

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17 मई की शाम से बार्ज P 305 पर सवार लोगों की तलाश जारी है। - Dainik Bhaskar

17 मई की शाम से बार्ज P 305 पर सवार लोगों की तलाश जारी है।

बार्ज पी-305 के डूबने और उस पर मौजूद लोगों की जान को खतरे में डालने के आरोप में बार्ज के कैप्टन राकेश बल्लव समेत अन्य लोगों पर मुंबई के येलो गेट पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गयी है। केस दर्ज होने के बाद से राकेश गायब है। दावा किया जा रहा है कि 17 मई को जब ‘ताऊ ते’ आया तो लाइफ जैकेट पहन राकेश बल्लब ने समुद्र में छलांग लगा दी थी।

बार्ज के इंजीनियर मुस्तफीजूर रहमना शेख की शिकायत पर धारा पुलिस स्टेशन में IPC की धारा 304(2)(गैर इरादतन हत्या),338(जान जोखिम में डालने) और धारा 34 के तहत FIR दर्ज की गई है। रहमान का आरोप है कि मौसम विभाग(IMD) की चेतावनी के बाद भी राकेश बल्लव ने बार्ज कर्मचारियों की जान खतरे में डाली।

लगातार 5वें दिन भी नौसेना और कोस्टल गार्ड का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। वेस्टर्न नेवल कमांड के प्रवक्ता कमांडर मेहुल कार्निक ने बताया कि 5 INS शिप अभी भी समुद्र में फंसे लोगों की तलाश में जुटी हुई है। बार्ज पर काम करने वाले 22 कर्मचारी अभी भी लापता हैं। शुक्रवार सुबह तक 51 शव बरामद हो चुके हैं। इनमें से 31 शव मुंबई पुलिस को सौंप दिए गए हैं। अन्य शवों को पुलिस पुलिस को सौंपने की प्रक्रिया जारी है।

कंपनी की लापरवाही से गई 50 से ज्यादा लोगों की जान
रहमान ने आरोप लगाया है कि बार्ज पर मौजूद लोगों ने कई बार राकेश और कंपनी के बड़े अधिकारियों से तट पर चलने के लिए कहा, लेकिन वे बार-बार सब ठीक है कहते रहे। उनकी लापरवाही से 50 से ज्यादा लोगों की जान गई है। उन्होंने कहा है कि IMD की चेतावनी के बाद 14 से 15 मई के बीच जहाज पी 305 को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया होता तो 261 लोगों की जान मुसीबत में नहीं फंसती।

इंजीनियर रहमान को भी आई है गंभीर चोटें
FIR दर्ज करवाने वाले चीफ इंजीनियर रहमान बार्ज के डूबने के दौरान आखिरी समय तक वहां मौजूद थे। बार्ज के डूबने के कारण उन्हें काफी चोट आई है और वो ताड़देव के अपोलो अस्पताल में भर्ती हैं।

लगातार 5वें दिन जारी है नेवी का रेस्क्यू ऑपरेशन
वेस्टर्न नेवल कमांड के प्रवक्ता कमांडर मेहुल कार्निक ने बताया कि दुर्घटना के दिन ताउते के चलते कुछ मीटर की दूरी पर भी रेस्क्यू टीम को कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। इसी दौरान चक्रवाती तेज हवाओं और घनघोर बारिश के चलते अलग-अलग दिशा में समंदर में बहे लोगों को बचाना बेहद चुनौतीपूर्ण था। ऐसे में, लाइफ जैकेट में लगी बैटरी उनके लिए सहायक बनी, जिसकी रोशनी से वह तेजी से नाविकों तक पहुंच पाए। तेज हवा और ऊंची लहरों के बीच नौसैनिकों ने 17 मई की रात 60 और सुबह तक कुल 188 लोगों का रेस्क्यू कर लिया गया है।

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