जागरूक नागरिकों की अर्जी: इंडोनेशिया में साफ हवा के लिए शांत विद्रोह, प्रदूषण पर काबू पाने में विफल रहने पर राष्ट्रपति समेत तीन कैबिनेट मंत्रियों पर मुकदमा

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3 मिनट पहले

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प्रदूषण में घिरा जकार्ता शहर। - Dainik Bhaskar

प्रदूषण में घिरा जकार्ता शहर।

  • समस्या के हल की बजाय सरकार नई राजधानी बना रही है

‘जब मैं जकार्ता की ट्रैफिक जाम वाली सड़कों से गुजरता हूं, तो मुझे खांसी जरूर आती है। पर मुंह पर मास्क लगा होने से मैं खखार भी नहीं निकाल सकता। जब मैं अपने चेहरे को पोंछता हूं तो कपड़े पर कालिख ही दिखाई देती है, चेहरे का यह हाल है तो फेेफड़ों में कितना प्रदूषण जाता होगा। यह अकल्पनीय है।’

ये व्यथा है इंडोनेशिया की राजधानी और सबसे प्रदूषित शहर जकार्ता के 36 साल के वीडियोग्राफर अदिथो हरिनुग्रोहो की। अदिथो उस केस में वादी हैं जिसमें इंडोनेशनिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो, स्वास्थ्य मंत्री, पर्यावरण और गृह मंत्री समेत तीन प्रांतीय गवर्नरों को शहर में प्रदूषण पर नियंत्रण में विफल रहने पर अभियुक्त बनाया गया है। 32 लोगों द्वारा लगाए गए इस केस में जकार्ता के कंम्यूटर टीचर इस्तु प्रायोगी भी इस केस में वादी हैं। उन्होंने पांच साल पहले फेफड़ों की जांच करवाई थी।

इसमें पता चला कि सिगरेट पीने से जैसा नुकसान होता है, वही हाल इस्तु के फेफड़ों का था। जबकि वे धूम्रपान करते ही नहीं हैं। दरअसल उनकी ये दशा जकार्ता के ट्रैफिक में घंटों बिताने से हुई थी। इस मामले में गुरुवार को सुनवाई होनी थी। पर केस की फाइल में कुछ जरूरी कागजात गुम होने के कारण जजों ने सुनवाई टाल दी। इस्तु के मुताबिक यह अहम मुद्दा है क्योंकि साफ हवा हर व्यक्ति की जरूरत है।

2.9 करोड़ आबादी वाले जकार्ता में प्रदूषण इतना ज्यादा है कि राष्ट्रपति जोको विडोडो ने इस समस्या की अनदेखा करते हुए बोर्नियो द्वीप पर नई राजधानी बसाने की घोषणा कर दी थी। मामले को कोर्ट में लाने वाली पर्यावरण कार्यकर्ता युयुन इस्मावती के मुताबिक इंडोनेशिया में वायु प्रदूषण के मानक डब्लूएचओ द्वारा प्रस्तावित स्तर से बहुत कम हैं। ये भी सख्ती से लागू नहीं हैं। वे बताती हैं कि गाड़ियों का धुआं, पावर प्लांट, व्हीकल इंस्पेक्शन प्लांट के अलावा लेड बैटरियों की रिसाइक्लिंग, प्लास्टिक और टायर जलाने के उद्योग भी प्रदूषण की बड़ी वजह हैं।

प्रदूषण के चलते कोरोना का असर भी ज्यादा गंभीर होगा: स्टडी

दुनिया के 576 शहरों में पर्यावरण की स्थिति का विश्लेषण करने वाली फर्म वेरसिक मेपलक्राफ्ट की पिछले हफ्ते जारी रिपोर्ट के मुताबिक जकार्ता सबसे ज्यादा खतरे में है। इसी के चलते यहां भूकंप और बाढ़ का खतरा रहता है। रिपोर्ट में चेताया गया है कि इंडोनेशिया में प्रदूषण से कोरोना के नुकसान और गंभीर होंगे। दुनिया के चौथे सबसे बड़े देश में कोरोना के 17 लाख मामले हैं। जो दक्षिणपूर्व एशिया में सर्वाधिक हैं। विशेषज्ञों को ज्यादा चिंता बच्चों व युवाओं की है, उन्हें तो पूरी जिंदगी ये जोखिम झेलना है।

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