फडणवीस का सोनिया को ओपन लेटर: महाविकास अघाड़ी सरकार ने राज्य को भगवान के भरोसे छोड़ा, क्या मौतों को छिपाना ही महाराष्ट्र मॉडल?

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मुंबई5 दिन पहले

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यह पहली बार है जब CM देवेंद्र फडणवीस ने इस तरह से कोई ओपन लेटर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखा है। इसमें इशारों में CM उद्धव को हालात संभालने में नाकाम बताया गया है। - Dainik Bhaskar

यह पहली बार है जब CM देवेंद्र फडणवीस ने इस तरह से कोई ओपन लेटर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखा है। इसमें इशारों में CM उद्धव को हालात संभालने में नाकाम बताया गया है।

महाराष्‍ट्र में संक्रमण की स्थिति भले ही कंट्रोल में नजर आ रही है, लेकिन इसको लेकर सियासत का खेल तेजी से चल रहा है। पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस ने सोनिया गांधी को एक खुला खत लिखा है। इसमें कहा गया है कि कांग्रेस के समर्थन से बनी महाराष्‍ट्र सरकार राज्‍य में कोरोना महामारी से निपटने में नाकाम रही है।

लेटर में फडणवीस ने आरोप लगाया कि महाविकास अघाड़ी सरकार ने राज्य को भगवान के भरोसे छोड़ दिया है। मौतों का आंकड़ा तक छिपाया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या यही महाराष्ट्र सरकार का मॉडल है। उन्होंने कहा, ‘यह पब्लिक है सब जानती है।’

फडणवीस की सोनिया को चिट्ठी

  • ‘आदरणीय, श्रीमती सोनिया गांधी जी… आशा करते हैं कि आप स्वस्थ एवं कुशल होंगी। आप से पत्राचार का कुछ विशेष कारण है। हाल ही में मा. प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को भेजे आपके कुछ पत्र एवं कांग्रेस नेताओं के बयान पढ़ने में आए। शायद कुछ मुद्दे आपके ध्यान में नहीं लाए गए, ऐसा मुझे प्रतीत हुआ है। बस केवल उन्हीं बातों को आपके सम्मुख रखना इस पत्राचार का औचित्य है।
  • कई महीनों से हम सब कोरोना की महामारी का सामना कर रहे हैं। ऐसे में कई सवाल देश की स्थिति पर उठाए गए। यह तो आपके संज्ञान में होगा ही कि पूरे देश की स्थिति का विचार हम इस महामारी के परिपेक्ष्य में करते हैं। तब महाराष्ट्र की स्थिति को कतई नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
  • अगर हम 13 मई 2021 की बात करें तो देश के कुल कोरोना संक्रमण में 22 प्रतिशत संक्रमण का प्रमाण महाराष्ट्र का ही है (जो कई महीनों तक 30 प्रतिशत से भी अधिक रहा) देश की कुल मौतों में महाराष्ट्र का प्रतिशत आज भी 31 फीसदी के करीब है। अगर सक्रिय रोगी की बात करें तो 14 प्रतिशत अकेले महाराष्ट्र में है।
  • तो यह बात साफ है और हम आशा करते हैं कि, आप भी इस बात से सहमत होंगी कि, यदि महाराष्ट्र के हालात में जल्द सुधार होता है तो देश के उपलब्ध संसाधनों पर दबाव कम होगा और इस संकट का हम पूरी ताकत के साथ मुकाबला कर सकेंगे।
  • जैसा कि आप जानती हैं कि महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार नहीं है, फिर भी केंद्र की मोदी सरकार पूरी ताकत के साथ महाराष्ट्र की जनता के साथ खड़ी है। देशभर में जो भी राहत और सहायता उपलब्ध कराई गई, उसमें महाराष्ट्र को सबसे ज्यादा मदद मिली है। महाराष्ट्र को 1.80 करोड़ वैक्सीन दी गई, 8 लाख से अधिक रेमडेसिविर महाराष्ट्र को प्राप्त हुई।
  • अगर ऑक्सीजन की बात करें तो करीब 1750 मीट्रिक टन की आपूर्ति हो रही है। वैंटिलेटर, BiPAP और ऑक्सीजन कंसन्‍ट्रेटर भी बड़े पैमाने पर दिए गए हैं। हां यह बात अलग है कि, अपनी नाकामी छिपाने के लिए कई नेता मोदी सरकार पर टिप्पणी करने को ही अपना अंतिम लक्ष्य समझते हैं।

‘मौतें छिपा रही महाराष्‍ट्र सरकार’
पूर्व CM ने आगे लिखा, ‘प्रदेश सरकार और मीडिया का एक वर्ग मुंबई को ही महाराष्ट्र समझने की भूल करता है, परंतु मुंबई की भी परिस्थिति देखे तो यहां भी टेस्ट की कमी, कम टेस्ट में भी रैपिड एंटीजन टेस्ट का बहुतायत में समावेश करके एक नया मॉडल बनाया जा रहा है। कोरोना के कारण होने वाली मौतों को भी छिपाने का काम किया जा रहा है। ‘डेथ ड्यू टू अदर रीजन’ इस श्रेणी में भी जहां महाराष्ट्र के अन्य जिलों को मिलाकर 0.8 प्रतिशत मौते दर्ज की गई, वहीं मात्र मुंबई में यह 40 प्रतिशत है।’

कोरोना से निपटने के तरीके पर उठाया सवाल
उन्होंने आगे कहा, ‘हर संभव प्रयास किया जा रहा है कि मौतों को छिपाया जाए। मुंबई में सालाना होने वाली मौतें औसतन 88,000 के आसपास है, लेकिन 2020 में इसमें 20,719 की वृद्धि हुई। इनमें से कोरोना के कारण बताई गयी मौतें 11,116 थी। मात्र, 2020 में 9603 कोरोना मौतें छिपाई गईं। यही क्रम इस वर्ष भी जारी है। क्या इतने बड़े पैमाने पर मौतों को छिपाना ही महाराष्ट्र मॉडल है? आज भी शवों के अंतिम संस्‍कार के लिए वेटिंग पीरियड है। देश में हर रोज 4000 मौतें रिकॉर्ड हो रहीं, तो उसमें 850 केवल महाराष्ट्र से हैं। इसका मतलब 22 फीसदी मौतें केवल महाराष्ट्र में ही रिकॉर्ड हो रही है और सरकार मात्र अपनी वाहवाही करने में व्यस्त है।’

‘महाराष्ट्र को भगवान के भरोसे छोड़ा’
आखिर में पूर्व CM ने अपने पत्र में लिखा है, ‘महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी की सरकार ने मानो मराठवाडा, विदर्भ, उत्तर महाराष्ट्र जैसे पिछड़े क्षेत्रों को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। यहां कोई मदद नहीं दी जा रही। ग्रामीण इलाकों में ना तो अस्पताल के बेड्स उपलब्ध है और ना ही इलाज। रेमडेसिविर और ऑक्सीजन के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। उच्च न्यायालयों के विभिन्न खंडपीठ को हस्तक्षेप कर रेमडेसिविर आपूर्ति के लिए आदेश जारी करने पड रहे हैं।’

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