दि न्यूयार्क टाइम्स से विशेष अनुबंध के तहत: महिलाओं को वर्कफोर्स में वापस लाने 200 बिजनेस हाउस साथ आए, बच्चों व बुजुर्गों की देखभाल नीति में बदलाव के लिए दबाव बनाएंगे

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6 मिनट पहले

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ब्रॉन्क्स: बुजुर्गों का टीकाकरण घर पर किया जा रहा है। - Dainik Bhaskar

ब्रॉन्क्स: बुजुर्गों का टीकाकरण घर पर किया जा रहा है।

  • अमेरिका में वर्किंग वुमन के अनुकूल माहौल के लिए न्यू केयर इकोनॉमी काउंसिल गठित

कोरोना महामारी के चलते दुनियाभर में लोगों को वर्कफोर्स से बाहर होना पड़ा है। इसमें बड़ी संख्या महिलाओं की है। अमेरिका भी इस चुनौती का सामना कर रहा है। इसकी बड़ी वजह महिलाओं पर बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल की जिम्मेदारी होना है। महिलाएं वर्कफोर्स में बनी रहें, घर की जिम्मेदारियों के चलते उन्हें नौकरी से समझौता न करना पड़े इसलिए जेपी मॉर्गन चेज, वेरिजोन, स्पॉटिफॉय, उबर और मैकडॉनल्ड जैसे 200 से ज्यादा कारोबारी संस्थानों ने मिलकर अनूठी पहल की है। इन्होंने एक गठबंधन ‘न्यू केयर इकोनॉमी काउंसिल’ बनाया है, जो सुनिश्चित करेगा कि महिलाओं को घरेलू जिम्मेदारियों की वजह से घर न बैठना पड़े।

काउंसिल का जोर इस बात पर रहेगा अमेरिका में बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल की व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए सरकार पर दबाव बनाया जाए। इससे इकोनॉमिक रिकवरी हो सकेगी। इस काउंसिल का नेतृत्व वहां का एक एडवोकेसी संगठन कर रहा है। इसे हॉलीवुड की शक्तिशाली महिलाओं से फंडिंग मिलती है।

काउंसिल का स्पष्ट उद्देश्य है कि कार्यस्थल की नीतियों में सुधार लाने के लिए इन कारोबारी संस्थानों के शीर्ष एक्जिक्यूटिव्स को एक मंच पर लाना और कर्मचारियों के अनुकूल बदलाव लाने के लिए कांग्रेस पर दबाव बनाना है। खासकर महिलाओं के लिए ताकि वे काम पर लौट सकें।

काउंसिल सरकार को इस बात के लिए बाध्य करेगी कि परिवार को पर्याप्त पैसे मिलें, बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल किफायती हो , पेड मेडिकल लीव मिले। केयर देने वाले वर्कर्स को बेहतर सैलरी मिले। एडवोकेसी संगठन की प्रमुख टिना चेन के मुताबिक नियोक्ता इस पहल में भागीदारी निभाने को तैयार हैं। इसके अलावा राष्ट्रपति बाइडेन की चाइल्ड केयर के लिए 31 लाख करोड़ और बुजुर्गों की देखभाल के लिए 29 लाख करोड़ की प्रस्तावित फंडिंग से केयर गिविंग सिस्टम में सुधार की उम्मीद जगी है।

वर्कफोर्स में 1986 के बाद महिलाओं की भागीदारी सबसे कम

महामारी के चलते अमेरिका में देखभाल तंत्र की कलई खुल गई। कई चाइल्ड केयर सेंटर या तो बंद हो गए या उनका समय घटा दिया गया। इससे पैरेंट्स को बच्चों के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद जगह नहीं मिली। नतीजतन हजारों महिलाओं को घर बैठना पड़ा। अमेरिका में 1986 के बाद महिलाओं की भागीदारी वर्कफोर्स में सबसे निम्न स्तर पर है। कंपनियों ने लचीला कामकाज का समय, स्टाइपेंड जैसे उपाय किए, पर समस्या नहीं सुलझी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक बदलाव ही इसका समाधान है।

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