गुड़िया दुष्कर्म व हत्याकांड: 28 मई तक टली सजा पर सुनवाई; जंगल में मिला था छात्रा का शव, 6 व्यक्तियों पर लगे थे आरोप

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शिमलाएक दिन पहले

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गुड़िया रेप और मर्डर केस में दोषी करार दिए गए अनिल कुमार उर्फ नीलू उर्फ चरानी को ले जाती पुलिस। - Dainik Bhaskar

गुड़िया रेप और मर्डर केस में दोषी करार दिए गए अनिल कुमार उर्फ नीलू उर्फ चरानी को ले जाती पुलिस।

  • SIT की जांच में दुष्कर्म के बाद हत्या का हुआ था खुलासा

हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित गुड़िया दुष्कर्म और हत्याकांड मामले में दोषी को आगामी 28 मई को सजा सुनाई जा सकती है। शिमला जिले के गांव कोटखाई में 2017 में हुई वारदात में चरानी अनिल उर्फ नीलू को जिला शिमला की विशेष अदालत ने 28 अप्रैल को दोषी करार दिया था। दोषी को 11 मई को सजा सुनाई जानी थी, लेकिन कोरोना कर्फ्यू की बंदिशों के चलते 18 मई की तारीख तय कर दी गई थी। एक बार फिर कोरोना के कारण सजा टल गई और अब 28 मई की तारीख तय की गई है।

ये है पूरा मामला

4 जुलाई, 2017 को शिमला जिले के कोटखाई की एक छात्रा स्कूल से लौटते समय लापता हो गई थी। 6 जुलाई को कोटखाई के तांदी के जंगल में उसका शव मिला। जांच में पाया गया कि छात्रा की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी। इस केस की जांच पहले SIT कर रही थी। तत्कालीन IG जहूर जैदी की अध्यक्षता में गठित SIT ने रेप-मर्डर के आरोप में एक स्थानीय युवक सहित 6 लोगों को गिरफ्तार किया।

इनमें से एक नेपाली युवक सूरज की कोटखाई थाने में पुलिस हिरासत के दौरान मौत हो गई थी। उधर, जब इस मामले में न्याय की मांग को लेकर लोग सड़कों पर उतर आए और हिमाचल प्रदेश में कई जगह उग्र प्रदर्शन हुए तो यह केस CBI के हवाले कर दिया गया था। CBI ने ही इस मामले का खुलासा किया था। CBI ने गुड़िया रेप-मर्डर और सूरज हत्याकांड में दो अलग-अलग मामले दर्ज किए।

सूरज हत्याकांड में IG जैदी सहित 9 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया और इनके खिलाफ कोर्ट में चालान भी पेश किया गया। हाल ही में 28 अप्रैल को इस बहुचर्चित केस में शिमला जिला अदालत में विशेष न्यायाधीश राजीव भारद्वाज की अदालत ने 28 वर्षीय अनिल कुमार उर्फ नीलू उर्फ चरानी को दोषी करार दिया है। धारा 372 (2) (I) और 376 (A) के तहत दुराचार का दोषी माना।

हाईकोर्ट से दोबारा जांच की मांग

भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत उसे हत्या और धारा 4 में दमनकारी यौन हमला करने की सजा का पात्र माना। पीड़िता नाबालिग थी, इसलिए आरोपी को पॉस्को एक्ट के तहत भी दोषी माना गया। सजा का ऐलान करने के लिए कोर्ट ने 11 मई की तारीख दे दी। इसी बीच संबंधित पक्ष ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करके CBI की जांच में खामियां बताई हैं और इस मामले की जांच दोबारा करवाने की मांग की है।

शुक्रवार को हाईकोर्ट में न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश CB बारोवालिया की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई हुई। इस दौरान जस्टिस तरलोक सिंह चौहान ने खुद को सुनवाई वाले बेंच से अलग कर लिया है। इसके बाद दायर याचिका पर सुनवाई फिलहाल टल गई है। वहीं दोषी को सजा सुनाने के लिए सुनवाई 28 मई को होगी।

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