अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए तोड़ा कोविड प्रोटोकॉल: बीड में कोरोना संक्रमित महिला के शव को जबरदस्ती हॉस्पिटल से ले गए परिजन, पति समेत 4 पर दर्ज हुआ केस

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बीडएक दिन पहले

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महिला पिछले 28 दिन से बीड के इसी जिला हॉस्पिटल में एडमिट थी। - Dainik Bhaskar

महिला पिछले 28 दिन से बीड के इसी जिला हॉस्पिटल में एडमिट थी।

महाराष्ट्र के बीड से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक कोरोना संक्रमित महिला की अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए उसके परिजन उसका शव जबरदस्ती हॉस्पिटल से ले गए। मामले की जानकारी मिलने के बाद अस्पताल प्रशासन की कंप्लेंट पर पुलिस ने महिला के परिजनों पर केस दर्ज किया है। फिलहाल इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

28 दिन से हॉस्पिटल में थी
गेवराई तालुका के कुंभारवाड़ी की एक 32 वर्षीय महिला पिछले 28 दिनों से बीड के जिला अस्पताल में कोरोना पॉजिटिव होने के बाद से एडमिट थी। लगातार कम होती ऑक्सीजन की वजह से सोमवार तड़के उसकी मौत हो गई।

जीप में शव रख हो गए थे रवाना
महिला के भाई ने बताया, मेरी बहन 28 दिनों से कोरोना से जंग लड़ रही थी। सोमवार को उसकी हालत गंभीर हुई तो उसने हमें अपने पास बुलाकर कहा- मैं मर जाऊं तो मुझे गांव ले जाना। उसके निधन के बाद हम चाहते थे कि उसे अपने साथ ले जाएं। हमने जिद की तो हॉस्पिटल प्रशासन ने उसका एंटीजन टेस्ट करवाने की बात कही। दो बार रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके बाद हम उसे एक जीप में रखकर घर के लिए निकले। हम अभी रास्ते में ही थे कि हॉस्पिटल से फोन आया कि बहन की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इसके बाद हम वापस हॉस्पिटल आ गए और उसका अंतिम संस्कार कोविड प्रोटोकॉल के तहत किया।’

हॉस्पिटल को बिना बताए शव अपने साथ ले गए
बीड जिला हॉस्पिटल के अपर जिला सर्जन सुखदेव राठौड़ ने बताया कि हॉस्पिटल के वार्ड नंबर 5 में एक मरीज की मौत हो गई थी। उसके परिवार के लोग बिना किसी को जानकारी दिए शव को अपने साथ ले गए। इसके बाद हमने पुलिस को इसकी जानकारी दी और उनके कहने पर परिजन वापस शव को यहां लाये। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने सभी प्रोटोकॉल को फॉलो करते हुए शव का अंतिम संस्कार कर दिया। परिजन चाहते थे कि वे शव को अपने घर ले जाएं।

किसी की गिरफ्तारी नहीं
परिजनों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हॉस्पिटल की ओर से महिला के भाई, पति, पिता और एक अन्य शख्स पर केस दर्ज किया गया है। फिलहाल किसी को अरेस्ट नहीं किया गया है। महिला के भाई का कहना है कि निगेटिव एंटीजन रिपोर्ट मिलने के बाद वह हॉस्पिटल से उन्हें लेकर जा रहे थे। हमारा उद्देश्य सिर्फ इतना था कि हम अपनी बहन का अंतिम संस्कार उसकी इच्छा अनुसार कर सकें।

ICMR की नई गाइडलाइन का हवाला
महिला के भाई ने बताया कि ICMR की नई गाइडलाइन के मुताबिक, कोरोना संक्रमित व्यक्ति को 10 दिन बाद निगेटिव मान लिया जाता है। इस हिसाब से हमने कोई गलती नहीं की है। इसके बावजूद अगर हम पर केस हुआ है तो हम उसका जवाब कानूनी रूप से अदालत में देंगे।

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