छोटा राजन के परिवार पर शिकंजा: एक साल से फरार चल रही डॉन की भतीजी को पुणे से किया गया गिरफ्तार, 50 लाख रुपए की फिरौती मांगने का है आरोप

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पुणे12 मिनट पहले

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प्रियदर्शनी खुद को एक राजनीतिक दल की अध्यक्षा बताते हुए फिरौती की मांग कर रही थी। - Dainik Bhaskar

प्रियदर्शनी खुद को एक राजनीतिक दल की अध्यक्षा बताते हुए फिरौती की मांग कर रही थी।

पुणे की एंटी एक्सटोर्शन सेल ने गैंगस्टर छोटा राजन की भतीजी प्रियदर्शिनी निकालजे को 50 लाख रुपये की फिरौती मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया है। प्रियदर्शिनी पिछले एक साल से फरार चल रही थी। पुलिस ने मुखबिरों की सूचना के आधार पर एक जाल बिछाया और प्रियदर्शनी को धर दबोचा।

प्रियदर्शिनी पर आरोप है कि उसने खुद को एक राजनीतिक दल की अध्यक्षा बताते हुए मार्च 2020 में एक व्यक्ति से 50 लाख रुपये की फिरौती मांगी थी। धमकी देने के दौरान उसने खुद को गैंगस्टर छोटा राजन की भतीजी होने का हवाला भी दिया था। आरोप है कि पैसे नहीं देने पर प्रियदर्शनी ने जान से मारने की धमकी भी दी थी।

फिरौती की आधी रकम लेते एक शख्स हुआ था अरेस्ट
इस मामले में शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जाल बिछाया और 25 लाख रुपये की फिरौती लेते हुए धीरज साबले और मंदार वाइकर नाम के शख्स को रंगेहाथ पकड़ा था। धीरज ने ही पूछताछ में प्रियदर्शिनी का नाम लिया था। पुलिस ने इसके बाद प्रियदर्शनी पर केस दर्ज किया था। इसके बाद से वह लगातार फरार चल रही थी।

ऐसे पकड़ी गई राजन की भतीजी
मंगलवार देर शाम एंटी एक्सटोर्शन सेल से जुड़े लोगों को सूचना मिली कि प्रियदर्शिनी निकालजे कल वानवाड़ी इलाके में आयी है। इसी के आधार पर दस्ते ने जाल बिछाकर उसे गिरफ्तार कर लिया। अदालत में पेश होने के बाद उसे सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।

कोरोना की वजह से सुर्खियों में आया था राजन
दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद डॉन छोटा राजन कुछ दिन पहले कोरोना बिमारी की वजह से सुर्खियों में आया था। पॉजिटिव होने के बाद उसे 22 अप्रैल को पहले जेल के हॉस्पिटल में और फिर 25 अप्रैल को एम्स में शिफ्ट किया गया था। 7 मई को राजन की मौत की अफवाह उड़ी थी। इसके बाद 11 मई को वह कोरोना से जंग जीतकर वापस तिहाड़ के जेल नंबर 2 में पहुंच गया था।

27 साल फरार रहने के बाद राजन 2015 में हुआ था अरेस्ट

कभी दाऊद के सबसे खास रहे छोटा राजन ने 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस के बाद अपनी राह अलग कर ली थी। जब उसे पता चला कि इस कांड में दाऊद का हाथ है, तो वह उसका दुश्मन बन बैठा। उसने खुद को दाऊद से अलग करके नया गैंग बना लिया। 27 साल फरार रहने के बाद छोटा राजन को नवंबर 2015 में गिरफ्तार कर इंडोनेशिया से भारत लाया गया था।

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