Bhojpuri: देशी मुर्गी बेलायती बोल- भोजपुरी पर भरोसा काहें नइखे

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कवनो सिनेमा में ओकर मूल भाषा के बड़ा महत्व बा. भाषा के आधार पर ही भारत में भा विदेश में सिनेमा के अलग-अलग इंडस्ट्री के बाँटल गइल बा, जइसे हिन्दी, मराठी, तमिल तेलुगु, अंग्रेजी, पंजाबी, ओसहीं भोजपुरी. जब मराठी, तमिल तेलुगु, अंग्रेजी आ पंजाबी फिल्म देखब त बुझाई कि ई फिल्म मराठी, तमिल तेलुगु, अंग्रेजी आ पंजाबी भाषा में बनल बा, बाकिर रउआ भोजपुरी फिल्म देखब त बुझाई कि ई त खिचड़ी बनल बा. कहे के माने, भोजपुरी में हिन्दी आ अंग्रेजी मिक्स क के ना जाने कवन सिनेमा बनत बा. बात ई बा कि भोजपुरी फिल्मकार लोग के भोजपुरी पर भरोसा काहें नइखे? रउआ हालिया रिलीज भइल भा पिछला कुछ साल के भोजपुरी फिल्म के टाइटल देखीं. रउआ नब्बे फीसदी नाम हिन्दी में मिली, कुछ दूसरो भाषा में मिल जाई. माने लेबल कुछु अउर, माल कुछु अउरी. दुल्हिन वही जो पिया मन भाए, हम हैं राही प्यार के, यारा तेरी यारी, आये हम बाराती बारात लेके, क्रेक फाइटर, शेर-ए-हिंदुस्तान, मुकद्दर का सिकंदर, हिंदुस्तान की कसम आदि. अधिकतर फिलिम के ट्रेलर भा फिल्म देखब त हीरो के एंट्री होई शेर-ओ-शायरी बोलत. फिल्म के कुछ डायलॉग हीरो जरूर हिन्दी मे बोली भले ओकर कवनो सिचुएशन ना होखे, गरज ना होखे. कहल जाला कि जब कवनो काम करे त ओकरा बेहतरीन करे के चाहीं. बाकिर ढंग से हिन्दी ना बोल पावे वाला कलाकार जबरदस्ती हिन्दी में संवाद भा शेर बोलेला त ओकरा के एतना रेघा देला कि रउआ सुन के चिढ़ मच जाई. अइसन अदायगी करेला जइसे रोड पर के लखेरा कवनो लइकी के छेड़त शायरी बोलत होखे. का फिल्मकार आ कलाकार लोग ई बतावे के चाहत बा कि भोजपुरी के हीरो लखेरा ही होला, कवनो पढ़ल लिखल सभ्य समाज के लइका ना होला? शायद फिल्मकार के ई भरोसा बा कि लखेरवा ई डायलॉग सुनके खूब ताली पिटिहsसन आ एही कारण ई भोजपुरी फिल्म में सेट फार्मूला बन गइल बा. शेर, दोहा भा मुक्तक में त एतना दम होला कि जदी ओकरा के पूरा भाव अउरी वजन से कहल जाव त ओकरा में प्रेम भा दर्द के सागर उतर सकेला. बाकिर भोजपुरी सिनेमा में अक्सर शेरो शायरी के मखौले उड़ेला. आ शेर होला कहाँ? फिल्मन में अधिकतर शेर तुकबंदी होला आ उहो बिना कवनो गहिरा भाव-व्यंजना के. जदी गाना के बात कइल जाव त अधिकांश भोजपुरी फिल्मन में एक दुगो गाना जरूर हिन्दी के डलाता जइसे हिन्दी के छौंक देहले बिना भोजपुरी सिनेमा अधूरा बा. हमरा कबो-कबो लागेला कि शायद भोजपुरिया सिनेमा वाला लोग के मन में ई कुंठा बा कि उ हिन्दी सिनेमा में काहें ना गइल लोग, एही से भोजपुरिए में हिन्दी गाना आ डायलॉग बोल के अपना मन के संतोष देला. बिना हिन्दी आ अंग्रेजी के पॉलिश के जइसे भोजपुरी फिल्म के केहू पूछी ना अइसन धारणा बन गइल बा. अउरी ई सभकरा साथे बा उ रउआ कवनो सुपरस्टार-डुपरस्टार, चवन्नी स्टार, अठन्नी स्टार के फिलिम उठा के देख लीं. कई बार लागेला कि भोजपुरिया स्टार लोग के मन में ई कॉम्प्लेक्स बा कि हिन्दी में डायलॉग ना बोलब त लोग हमके अनपढ़ गंवार बूझी जइसे कि ओकरा खाली भोजपुरिए आवेला, जइसे कि भोजपुरी गंवार के भाषा होखे. जदि अइसन बा त हमार सलाह बा कि दू चार गो संवाद जर्मन, फ्रेंच अउरी स्पैनिश के भी रखे के चाहीं. जेकरा से पता लागो कि हमनी के स्टार लोग काफी ज्ञानी बा. बाकिर मूल स्थिति ई बा कि जब ई लोग हिन्दी बोले खातिर भी चोंच खोलेला त उहो नीक ना लागेला.भोजपुरी सिनेमा में अधिकतर सुपरस्टार लोग से संवाद अदायगी अउरी उच्चारण पर काम करे के आशा कइले बेमानी बा. अरे जे भोजपुरी के भजपुरी बोलता, ओह सुपरस्टार के बारे में हम का कहीं. अक्सर दोसरा भाषा जइसे हिन्दी के कवनो फिल्म निर्माण होला त शूटिंग शुरू होखला से पहिले कलाकार के ओकरा किरदार के हिसाब से संवाद बोले के प्रशिक्षण दिहल जाला. बाकिर इहाँ त हीरो मुंह से जवन कढ़ा देहलस उहे फाइनल टेक हो जाला. साँच कहsतानी, भोजपुरी सिनेमा के लोगन के भोजपुरी पर भरोसा नइखे. जब भोजपुरी सिनेमा के शुरुआत भइल त ओ बेर तुरते के देश आजाद भइल रहे, अंग्रेजी अउरी हिन्दी के त ढेरे प्रभाव रहे, लोग ई भाषा बोलके अपना के बड़ समझे. लेकिन ओहू बेरा जब हिन्दी सिनेमा से लेखक, निर्देशक, कलाकार अइलें आ समानांतर भोजपुरी सिनेमा बनल त उ खाँटी भोजपुरी बोललें. ए बेरा त ढेर लोग भोजपुरी पट्टी से बा, भोजपुरी माटी के खाँटी लाल बा आ सीधे भोजपुरिए से आपन काम शुरू कइले बा, करत बा, तबो ई हाल बा. ओ बेरा त सभे हिन्दी सिनेमा से भोजपुरी में आइल. रउआ पुरनका फिलिम के नाम देख लीं, गाना सुन लीं, संवाद देख लीं, संवाद अदायगी आ कलाकारी देख लीं. अहा! मन हरिहरा जाई. आ एह बेरा के फिलिम देख लीं, गाना सुन लीं, संवाद अउरी कलाकारी देख लीं, ई लागि कि ओ लोग से ढेर परदेसी त अपना भोजपुरिया माटी के ही लोग बा. ए चनेसर, ई देशी मुर्गी, बेलायती बोल काहें ? काहे ए चनेसर, काहें ? अपना इहाँ एगो कहावत बा- ‘’ भर बाहीं चूड़ी आ ना त रांड़ ‘’. कहे के माने कि अगर रउआ भोजपुरी के सिनेमा बनावत बानी त ढंग से भोजपुरिए में बनाईं, ई अधभेसर वाला मामला मजा नइखे देत. भाषा के डैमेज कर रहल बा. सिचुऐशन अउरी किरदार के हिसाब से थोड़ा-बहुत हिंदी-अंग्रेजी चली बाकिर जबरदस्ती ठूसी मत. अइसन कर के रउरा कूल ना, फूल लागेनी. देखीं सिनेमा समाज के आईना होले, ई बात साँच बा. राउर तर्क भी चलीं मान लेनी कि जज, कलक्टर आ डॉक्टर भोजपुरी कइसे बोली ? माने रउरा तय कर लेले बानी कि ज्यादा पढ़ल-लिखल लोग भोजपुरी ना बोले, ना बोली.
त एगो बात जान लीं, सिनेमा समाज के रास्ता भी त देखावेला, कुछ नया अउरी बढ़िया व्यवहार भी त सिखावेला. जज, कलक्टर आ डॉक्टर अउरी अइसन किरदार के भोजपुरी बोलत देखावल जवन अक्सरहा हिन्दी भा अंग्रेजी में बोलत होखो, एगो सुंदर प्रयोग हो सकेला. कम से कम एही बहाने त लोग भोजपुरी सिनेमा से कुछ देख के सीखो अउरी भोजपुरी के गँवार के भाषा ना बूझो. रउरो भोजपुरी के दूधवाला आ नोकर के भाषा मत बनाईं. हिंदी सिनेमा में त ई होते रहल बा. एगो अउरी चीज रउआ भोजपुरी में देखे के मिली, डायलेक्ट में अंतर. भोजपुरी बोले के कई गो तरीका बा आ ओकर कईगो एक्सेन्ट बा. अब कवनो फिल्म में एक परिवार में पाँच गो भाई बाड़न बाकिर सभ के भोजपुरी बोले के एक्सेन्ट अलग बा, कारण बा कि कलाकार अलग-अलग जगह के रहे वाला बाड़ें. केहू आरा वाला बोलत बा, केहू बनारस वाला त केहू गोरखपुरिया. एगो बात बताईं, एक घर में रहे वाला एके साथ के लोग हेतना विविधता कइसे लिया सकेला. इहे मिस मैच वाला संवाद सुनला के कारण दर्शक किरदार के साथे रिश्ता ना बना पावेला. इहे कुल्ह कमी हिन्दी में भा हॉलीवुड में ना देखे के मिलेला. काहें कि उहाँ हर एक किरदार के ओकर परिवेश के हिसाब से भाषा अउरी डायलेक्ट पर काम कइल जाला आ एतना बारीकी से काम भोजपुरी में तबे संभव बा जब भोजपुरिया सिनेमा के मठाधीश लोग सुधरी आ अपना चंगुल से भोजपुरी के आजाद करके नया प्रतिभा के आवे के मौका दी. ( लेखक मनोज भावुक भोजपुरी साहित्य व सिनेमा के जानकार हैं. )



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