बांग्लादेश में महिला जर्नलिस्ट गिरफ्तार: 98 साल पुराने सीक्रेसी लॉ के तहत रोजिना इस्लाम की गिरफ्तारी, सरकारी भ्रष्टाचार का खुलासा किया था

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ढाका5 मिनट पहले

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गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने रोजिना इस्लाम से पांच घंटे पूछताछ की। बाद में उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। - Dainik Bhaskar

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने रोजिना इस्लाम से पांच घंटे पूछताछ की। बाद में उन्हें कोर्ट में पेश किया गया।

बांग्लादेश के मशहूर अखबार ‘प्रोथोम आलो’ की इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट रोजिना इस्लाम को गिरफ्तार कर लिया गया है। रोजिना की गिरफ्तारी के लिए 1923 में बने गोपनीयता कानून उल्लंघन का इस्तेमाल किया गया। रोजिना के करीबियों ने सरकार की इस कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन किए हैं। उनका आरोप है कि रोजिना ने पिछले कुछ महीनों में सरकारी स्तर पर हो रहे भ्रष्टचार के खुलासे वाली कुछ रिपोर्ट्स पब्लिश की थीं। मंगलवार को गिरफ्तारी के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था थी।

अंग्रेजों के जमाने का कानून
रोजिना जिस प्रोथोम आलो अखबार में काम करती हैं, वह सर्कुलेशन के लिहाज से बांग्लादेश का सबसे बड़ा अखबार है। सोमवार को उन्हें हेल्थ मिनिस्ट्री के अफसरों ने पांच घंटे तक रोके रखा। रोजिना का पर आरोप था कि उन्होंने चुपके से अपने मोबाइल फोन में कुछ गोपनीय दस्तावेजों की तस्वीरें खींचीं। इसके लिए उन्होंने अफसरों से मंजूरी नहीं ली थी। कुछ देर बाद यानी देर शाम उन्हें पुलिस ने आधिकारिक तौर पर गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस को रिमांड नहीं मिला
मंगलवार को रोजिना को ढाका के एक कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान पुलिस ने पांच दिन का रिमांड मांगा। जज ने पुलिस की मांग खारिज करते हुए रोजिना को जेल भेज दिया। अगली सुनवाई गुरुवार को होगी।

कोर्ट में पेशी के बाद रोजिना को जेल भेज दिया गया।

कोर्ट में पेशी के बाद रोजिना को जेल भेज दिया गया।

किस बात का खामियाजा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल के दिनों में रोजिना कई बार हेल्थ मिनिस्ट्री गईं और गुपचुप तरीके से दस्तावेज जुटाए। इनके आधार पर हेल्थ मिनिस्ट्री में जारी भ्रष्टाचार का खुलासा किया गया। इसके बाद से ही वे सरकारी सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर थीं। इसके पहले भी डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर रिपोर्ट कर चुकी थीं। हाल ही में उन्होंने बताया था कि कैसे हेल्थ अफसरान की लापरवाही के चलते करोड़ों रुपए के मेडिकल इक्युपमेंट्स एयरपोर्ट पर ही पड़े रहे, जबकि इनका इस्तेमाल कोविड मरीजों के इलाज में किया जाना था।

सरकार चुप
हेल्थ मिनिस्टर जाहिद मलिक ने रोजिना की गिरफ्तारी को दुर्भाग्यपूर्ण तो बताया, लेकिन इसके बाद वे चुप्पी साध गए। रोजिना की गिरफ्तारी से उनके साथी नाराज हैं। उन्होंने हेल्थ मिनिस्ट्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस का बायकॉट कर दिया। उनके अखबार ने कहा- रोजिना अपना काम कर रही थीं। उन्हें गिरफ्तारी के बाद शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया गया।

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