भारत में बिगड़े हालात का दुनिया पर असर: दूसरी लहर ने कई देशों को कोरोना वैक्सीन की सप्लाई रोकी, अक्टूबर तक दोबारा निर्यात शुरू होने की संभावना नहीं


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नई दिल्ली33 मिनट पहले

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कोरोना के केस अचानक बढ़ने, वैक्सीन की कमी होने और तीसरी लहर की आशंका ने भारत की मुश्किल तो बढ़ाई ही है, दूसरे कई देशों को भी चिंता में डाल दिया है। भारत अब तक इन देशों को वैक्सीन सप्लाई करता आया है या इन्हें भारत से वैक्सीन मिलने की उम्मीद थी।

सरकार से जुड़े तीन सूत्रों के मुताबिक, अब हालात ऐसे हैं कि भारत अक्टूबर तक बड़े पैमाने पर वैक्सीन निर्यात शुरू कर पाने की स्थिति में नहीं है। इसकी वजह देश में वैक्सीन की डिमांड पूरी न होना है। अब सरकार का जोर पहले अपनी जरूरतें पूरी करने पर है। इसका बुरा असर दुनिया के गरीब देशों को वैक्सीन देने के लिए शुरू की गई वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) की पहल कोवैक्स पर पड़ेगा। उसे वैक्सीन की सप्लाई में देरी की आशंका है।

फोटो यूपी के प्रयागराज की है। यहां तेज बहादुर सप्रु हॉस्पिटल के बाहर वैक्सीन लगवाने आए लोगों की लंबी लाइन लग रही है। यूपी समेत कई राज्य वैक्सीन की कमी से जूझ रहे हैं।

फोटो यूपी के प्रयागराज की है। यहां तेज बहादुर सप्रु हॉस्पिटल के बाहर वैक्सीन लगवाने आए लोगों की लंबी लाइन लग रही है। यूपी समेत कई राज्य वैक्सीन की कमी से जूझ रहे हैं।

कोरोना के केस बढ़ने पर भारत ने निर्यात रोका
कोरोनावायरस के संक्रमण की दुनिया में सबसे तेज बढ़ोतरी से जूझ रहे भारत ने एक महीने पहले वैक्सीन का निर्यात रोक दिया था। इससे पहले भारत दुनिया के कई देशों को 6.6 करोड़ से ज्यादा डोज बतौर मदद दे चुका था या बेच चुका था।

निर्यात रुकने से बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका और अफ्रीका के कई देश वैकल्पिक सप्लाई के लिए हाथ-पांव मार रहे हैं। WHO ने सोमवार को ही भारत से बाहर वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों को दक्षिण एशियाई देश से वैक्सीन की कमी को देखते हुए कोवैक्स में एडवांस सप्लाई बढ़ाने की अपील की थी।

मार्च में वेस्ट अफ्रीका में भारत से वैक्सीन का शिपमेंट पहुंचा था।

मार्च में वेस्ट अफ्रीका में भारत से वैक्सीन का शिपमेंट पहुंचा था।

दूसरे देशों से कहा- अभी वैक्सीन की उम्मीद न करें
रायटर्स के मुताबिक, यह जानकारी देने वाले सूत्र इस विषय पर मीडिया जानकारी देने के लिए अधिकृत नहीं थे। नाम उजागर न करने की शर्त पर उन्होंने बताया कि भारत अब अपने यहां वैक्सीनेशन प्रोग्राम को प्रायोरिटी देगा क्योंकि, कुल संक्रमितों की संख्या ढाई करोड़ के पार हो चुकी है और हर दिन मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

एक सूत्र ने निर्यात रोकने के फैसले के बारे में बताया कि हमें आधिकारिक तौर पर सभी देशों को बताने की जरूरत नहीं है, क्योंकि हम ऐसा करने के लिए बाध्य नहीं हैं। इस पर आपस में ही चर्चा की गई और कुछ देशों को कहा गया कि वे भारत में स्थिति को देखते हुए अभी वैक्सीन मिलने की उम्मीद न करें। हालांकि, सूत्र ने इन देशों के नाम नहीं बताए।

भारत की ओर से स्वदेशी वैक्सीन के डोज नामीबिया भेजे गए थे।

भारत की ओर से स्वदेशी वैक्सीन के डोज नामीबिया भेजे गए थे।

दूसरी लहर काबू में आने पर ही सप्लाई शुरू होगी
दूसरे दो सूत्रों ने बताया कि निर्यात फिर से शुरू करने का सही समय इस बात पर निर्भर करता है कि भारत कितनी जल्दी कोरोना की दूसरी लहर पर काबू पाता है, जिसने देश की हेल्थ सिस्टम को बुरी तरह प्रभावित किया है। रायटर्स के मुताबिक, वैक्सीन निर्यात की निगरानी और देखरेख करने वाले भारत के विदेश मंत्रालय से उसका पक्ष पूछा गया, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं आया।

कोवैक्स को सीरम से मिलने वाले 14 करोड़ डोज अटके
दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के एक प्रवक्ता का कहना है कि फिलहाल देश में टीके की सप्लाई पर ध्यान दिया जा रहा है। इससे पहले जून से शिपमेंट फिर से शुरू होने की उम्मीद थी।

अक्टूबर की समयसीमा के बारे में पूछे जाने पर कोवैक्स के सहयोगी वैक्सीन अलायंस GAVI ने रॉयटर्स को बताया कि मई के आखिर तक सीरम इंस्टीट्यूट से कम से कम 14 करोड़ डोज मिलने की उम्मीद थी, लेकिन ये अब भारत में ही इस्तेमाल होंगी।

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