ओलिंपिक गेम्स को लेकर सख्ती: जिस टोक्यो में 66 दिन बाद ओलिंपिक गेम्स, वहां सड़कें सूनीं, सख्ती ऐसी कि अगर कोई खिलाड़ी प्रोटोकॉल तोड़े तो पूरी टीम डिसक्वालिफाई

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12 मिनट पहले

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क्वालिफाई करने वाले अरविंद और अर्जुन - Dainik Bhaskar

क्वालिफाई करने वाले अरविंद और अर्जुन

  • टोक्यो से रोइंग के लिए क्वालीफाई कर लौटे खिलाड़ियों-कोच ने बताया आंखों देखा हाल
  • होटल से खेलने व खाने के लिए ही निकलना संभव, एप पर रोज देना होता है हेल्थ अपडेट

ओलिंपिक गेम्स में 66 दिन बचे हैं। जापान की जनता इसके विरोध में है, जबकि इंटरनेशनल ओलिंपिक कमेटी आयाेजन पर अडिग है। टाेक्याे से राेइंग लाइटवेट डबल स्कल इवेंट का ओलिंपिक काेटा लेकर लाैटे राेअर अरविंद सिंह, अर्जुन जाट और उनके कोच इस्माइल बेग व दलवीर सिंह ने टोक्यो का आंखों देखा हाल बताया। ‌भारतीय रोइंग टीम (पुरुष) के चीफ कोच इस्माइल बेग ने बताया, हम एक मई से 9 मई तक टाेक्याे में रहे। हनेडा एयरपाेर्ट के पास समुद्र के किनारे 8 लेन का राेइंग काेर्स बना है। वहां फिनिश पाॅइंट पर कैमरे लग रहे हैं।

राजधानी की सड़काें पर एक-दो जगह ही ओलिंपिक के होर्डिंग लगे दिखे। मेडिकल इमरजेंसी के चलते सड़कों पर सन्नाटा था। मैं पहले भी टोक्यो गया हूं, पर ऐसा कभी नहीं देखा। यकीन नहीं होता कि 66 दिन बाद इसी शहर में ओलिंपिक होना है। इमरजेंसी स्टाफ के लोगों से सड़कों का सन्नाटा टूटता है। सख्ती ऐसी कि हम होटल में भी किसी से बात नहीं कर सकते। होटल से क्लब पहुंचने में 20-25 मिनट लगते थे। इसी बीच बस में टीम मीटिंग होती थी।

भारतीय रोइंग टीम (महिला) के कोच दलवीर सिंह ने बताया, हम पहुंचे तो एयरपोर्ट पर आरटीपीसीआर जांच हुई। सबके माेबाइल में अकाेवा एप डाउनलाेड कराया, किसी के फोन पर एप काम न करे तो उसे अपग्रेड मोबाइल रेंट पर लेना पड़ता। चार-पांच घंटे बाद एयरपोर्ट से निकल सके। अकोवा एप पर राेज हेल्थ अपडेट देनी हाेती थी। एक और एप से हमारी लोकेशन ट्रेस हाेती थी। दिन में 10 से 12 बार टेम्प्रेचर चेक हाेता।

इवेंट से एक दिन पहले सभी खिलाड़ियाें व स्टाफ का आरटीपीसीआर टेस्ट हुआ। निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद रूम से निकल सकते थे। एक भी खिलाड़ी या स्टाफ प्राेटाेकाॅल फाॅलाे न करे तो पूरी टीम को डिस्क्वालिफाई करने की चेतावनी आयोजन समिति ने दी थी।
(जैसा कृष्ण कुमार पांडेय को बताया)
खाते समय भी बात नहीं कर सकते थे, बोट पर ही उतार सकते थे मास्क

अरविंद और अर्जुन ने बताया, हमें खेलने और खाने के लिए ही हाेटल रूम से निकलने की अनुमति थी। खाने पर मिलते पर बात नहीं कर सकते थे। अलग-अलग डाइनिंग हाॅल थे। टीमाें का टाइम अलग था। 3-4 मीटर के फासले पर टेबल थीं। एक टेबल पर दो लोग बैठते और बीच में कांच लगा था। इवेंट वाले दिन सुबह 7 बजे होटल से निकलते थे। हमें सिर्फ बोट पर मास्क उतारने की अनुमति थी।

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