जानिए 32 साल पुराने उस केस के बारे में जिसके लिए हुई पप्पू यादव की गिरफ्तारी

[ad_1]

कोर्ट ने 10 फरवरी 2020 को पप्पू यादव के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था..

कोर्ट ने 10 फरवरी 2020 को पप्पू यादव के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था..

कथित घटना 29 जनवरी 1989 की है. आरोप है कि पप्पू यादव ने अपने तीन चार साथियों के साथ मिलकर मधेपुरा जिला के मुरलीगंज थाना अंतर्गत मिडिल चौक से रामकुमार यादव और उमा यादव का अपहरण किया था.

मधेपुरा. मधेपुरा के पूर्व सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी के बाद बिहार का राजनीतिक पारा चढ़ गया है. हर आदमी यह जानना चाह रहा है कि आखिर पप्पू यादव को क्यों और किस मामले में गिरफ्तार किया गया है? पप्पू की पहचान भले ही कभी ‘बाहुबली’ के रूप में होती थी लेकिन पिछले कुछ वर्षों से उन्होंने अपनी छवि बदलने की भरपूर कोशिश की है. उनकी गिरफ्तारी से सभी अचंभित हैं. जिस मामले में पप्पू यादव की गिरफ्तारी हुई है वह मामला 32 साल पुराना है. कथित घटना 29 जनवरी 1989 की है. आरोप है कि पप्पू यादव ने अपने तीन चार साथियों के साथ मिलकर मधेपुरा जिला के मुरलीगंज थाना अंतर्गत मिडिल चौक से रामकुमार यादव और उमा यादव का अपहरण किया. इसकी शिकायत शैलेन्द्र यादव ने की थी. कुछ दिनों के बाद दोनों अपहृत सकुशल वापस लौट गए थे. 3 महीने बाद पप्पू यादव की भी गिरफ्तारी हुई थी. कुछ महीने जेल में रहने के बाद बेल पर बाहर आए और फिर वे विधायक और MP बनते चले गए. इस बीच यह केस पीछे छूटता चला गया. बताया जाता है कि लंबे समय से बेल पर रिहा होने के बाद इस केस में पप्पू कभी कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए. 1996 में राजनीति के अपराधीकरण पर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद माननीय उच्चतम न्यायालय ने एमपी और एमएलए और दर्ज मुक़दमे पर त्वरित सुनवाई का आदेश दिया गया. इसके बाद ऐसे मुकदमे के त्वरित निष्पादन के लिए हर जिले में स्पेशल कोर्ट बनाया गया. मधेपुरा में एसीजेएम प्रथम के स्पेशल कोर्ट में इसकी सुनवाई होती रही. 10 फरवरी 2020 को कोर्ट ने पप्पू यादव के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था लेकिन यह वारंट उन्हें नहीं मिला. सूत्र बताते हैं कि विधानसभा चुनाव में पप्पू यादव के बिहार में चल रहे धुआंधार प्रचार से जुड़ी खबर पर न्यायालय ने एक बार फिर पुलिस को शोकॉज नोटिस जारी किया. न्यायालय ने पूछा जब पप्पू यादव पर गिरफ्तारी वारंट है, तब वे चुनाव-प्रचार कैसे कर रहे हैं. न्यायालय में 17 सितंबर 2020 को पुलिस की तरफ से एक आवेदन दिया गया. इस आवेदन में बताया गया कि वारंट की कॉपी चौकीदार के द्वारा खो दी गई जिसके कारण वारंट तामील नहीं हो पाया. ऐसे में न्यायालय वारंट की दूसरी प्रति का अनुरोध किया. वारंट की दूसरी कॉपी भी जारी की गई लेकिन मधेपुरा पुलिस ने फिर भी पप्पू यादव को गिरफ्तार नहीं किया. पप्पू यादव बिहार में रहे लेकिन मधेपुरा पुलिस ने उन्हें फरारी बताते हुए धारा 83 के तहत उनके घर की कुर्की जब्ती का वारंट मांगा. 22 मार्च को न्यायालय ने पप्पू यादव के घर की कुर्की जब्ती का वारंट जारी कर दिया. इसके बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की. अब पुलिस ने इस वारंट पर कार्रवाई शुरू की है. ऐसे में पुलिस को यह 32 साल पुराना मामला एक बड़े हथियार के रूप में मिल गया और पप्पू यादव को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है.







[ad_2]

Source link

Live Sachcha Dost TV

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: