युद्ध का रूप लेती जा रही है यरूशलेम हिंसा, भारत ने भी की शांति की अपील

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यरूशलेम से भड़की हिंसा थम नहीं रही.

यरूशलेम से भड़की हिंसा थम नहीं रही.

इजरायल-फिलिस्तीन के बीच एक बार फिर से तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है. यरूशलेम में भड़की हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रही है. गज़ा पट्टी से फिलिस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास और इजराइल की सेनाओं के बीच लगातार रॉकेट दागे जा रहे हैं, जिसका खामियाजा दोनों देशों के मासूम लोग चुका रहे हैं.

न्यूयॉर्क, यरूशलेम की अल अक्स मस्जिद पर शुरू हुआ संघर्ष अब बड़ा रूप अख्तियार करता जा रहा है. हालात ये हैं कि इजरायल और फलिस्तीन आमने-सामने आ चुके हैं. दोनों ओर से रात-रात भर रॉकेट से हमले हो रहे हैं और गजा पट्टी मरने वालों की संख्या भी 20 से ऊपर पहुंच चुकी है. इस मामले पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को आपातकालीन बैठक भी बुलानी पड़ी. जिसमें इजरायल से आह्वान किया गया है कि वो पवित्र स्थलों पर ऐतिहासिक यथास्थिति का सम्मान करते हुए इस मामले पर संयम बरते. भारत ने भी इजरायल से की अपील संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत ने पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि हरम अल शरीफ में हो रही हिंसा को लेकर हम चिंतित हैं. इसके साथ ही शेख जरह और सिलवान में लोगों को निकाले जाने की घटना पर चिंता जाहिर करते हुए भारत की ओर से कहा गया है कि दोनों ही पक्ष ज़मीनी यथास्थिति को बनाए रखें. भारत के अलावा भी विश्व के कई देशों ने हिंसा पर चिंता जताते हुए शांति बनाए रखने की अपील की है. इसाई धर्मगुरु पोप फ्रांसिस ने भी शांति की अपील करते हुए कहा है कि हिंसा सिर्फ हिंसा को जन्म दे सकती है. किस विवाद के चलते हुई हिंसा?इज़राइली सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय से चल रहे एक केस की 10 मई को सुनवाई होनी थी, जिसमें ये फैसला लिया जाना है कि दमिश्क गेट के करीब शेख़ जर्राह इलाके से फिलिस्तीनी परिवार और उनके घरों को हटाकर, वहां इज़राइलियों को बसाया जाए या नहीं. सुनवाई की तारीख करीब आने के साथ ही फिलिस्तीनी और वामपंथी इज़राइलियों ने प्रदर्शन करने शुरू किए. बेदखली की धमकी के चलते ही दोनों देशों के बीच मामला और बिगड़ा, जिसका नतीजा ये हिंसा रही. शेख़ जर्राह में यहूदियों के प्राचीन उच्च पुजारी शिमोन द जस्ट का गुंबद भी है, जिसके दर्शन के लिए यहूदी लगातार यहां आते रहते हैं और इस वजह से फिलीस्तिनियों से उनकी भिड़ंत का तनाव बढ़ता है. हालांकि निचली अदालत ने इस केस के लिए कहा था कि 1948 युद्ध से पहले यह विवादित ज़मीन पूर्वी यरुशलम की थी. अल अक्सा मस्जिद में क्या हुआ? इजराइली पुलिस का कहना है कि हजारों की संख्या में फिलिस्तीनियों ने रात के समय इमारत के भीतर घुस गए. इस दौरान इन लोगों ने पत्थर और पेट्रोल बम लिया हुआ था. इससे पहले सोमवार को ही दिन में पुलिस के ऊपर पत्थरबाजी की गई थी. ऐसे में अधिकारियों के आदेश पर पहुंची पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को काबू में करने के लिए करीब एक घंटे तक रबर बुलेट्स और आंसू गैस के गोले दागे. प्रदर्शनकारी भी पुलिस पर पत्थर फेंकते रहे. इज़रायली पुलिस ने शाम को इफ्तारी की भीड़ रोकने के लिए पुराने शहर दमिश्क के गेट पर बैरियर लगा दिया. इस बैरियर को फिलिस्तीनी स्वतंत्रता में पाबंदी के तौर पर देख रहे हैं जबकि पुलिस कह रही है कि ये कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए है.
हिंसा में सैकड़ों लोग जख्मी, बच्चे भी शिकार इज़राइल-फिलिस्तीन के बीच के इस संघर्ष में 700 लोग जख्मी हो गए हैं, जिनमें 500 लोगों को अस्पताल ले जाया गया है. रात भर चलने वाले रॉकेट्स की वजह से बच्चों को भी चोट आ रही है. अब तक हिंसा की भेंट करीब 9 बच्चे चढ़ चुके हैं. अंतरराष्ट्रीय अपील के बाद भी इज़राइल पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा है. फिलिस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास का कहना है कि वो अक्सा मस्जिद की हिफाजत कर रहा है. जिस पर इज़राइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने साफ कहा है कि हमास ने रॉकेट दागकर सीमा पार कर दी है और वो आतंकी ठिकानों को निशाना बना रही है.







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