Bhojpuri: औघड़ क शाप, अउर सून होइ गयल राजा चेत सिंह क किला

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बनारस के शिवाला महल्ला में एक ठे छोट क किला हौ. इ किला बनारस स्टेट क दूसरे नंबर क राजा चेत सिंह 18वीं शताब्दी के बीच बनवउले रहलन. आज इ किला खंडहर होइ गयल हौ. इहां चमगादड़ अउर कबूतर क बसेरा रहयला. किला क इ हालत आजू क नाहीं हौ, 18वीं शताब्दी के अंत में ही इ बीरान होइ गयल रहल. एकरे पीछे एक सच्ची कहानी हौ. कहानी एतनी अचरज वाली हौ कि केव भी सुनि के दांते तले अंगुरी दबाइ लेय. इ कहानी कम लोगन के पता हौ. गंगा के पश्चिमी तट पर मौजूद इ किला भले ही छोटा रहल, लेकिन बहुत सुंदर रहल. किला में भगवान शिव क तीन मंदिर अउर एक मंदिर सरस्वती माई क हौ. एकरे चारों ओरी बुर्ज बनल हौ. सुंदर बरामदा अउर बारादरी भी हौ. राजा चेत सिंह 1770 में गद्दी संभरले के बाद रूद्राभिषेक करावत रहलन. पूरा बनारस कार्यक्रम में शामिल होवय बदे किला में उमड़ल रहल. किला से थोड़ी ही दूरी पर अघोराचार्य बाबा कीनाराम रहत रहलन. बाबा कीनाराम सिद्ध औघड़ रहलन. ओनके मुंहे से जवन भी निकलय, उ सच होइ जाय. काशी में बाबा कीनाराम क बहुत सम्मान रहल. ओन्हय भगवान शिव क रूप मानल जात रहल. लेकिन राजा के कार्यक्रम में ओन्हय न्योता नाहीं रहल. बाबा गदहा पर सवार होइके बिना बोलउलय अपने बिलारी के साथ किला के गेट पर पहुंचि गइलन. दरबान से राजा के पास संदेशा भेजवउलन. लेकिन राजा चेत सिंह अउर ओनकर दरबारी लोग बाबा क भेष-भूसा देखिके ओनकर अपमान कइलन. उ कहलन कि इहां वेद-शास्त्र के विद्वानन क काम हौ, औघड़न क कवनो जरूरत नाहीं हौ. बाबा कीनाराम कहलन कि पहिले हमरे गदहा से वेद सुनि ले, फिर हमार बात करे. एतना कहि के बाबा अपने गदहा के एक डंडा मरलन अउर गदहवा वेद पढ़य लगल. इ दृश्य देखि के राजा अउर ओनकर दरबारी चकित रहि गइलन अउर बाबा के गोड़े गिरि पड़लन. लेकिन बाबा ओही समय चेत सिंह के शाप देइ देहलन -राजन तू हमार अपमान कइला, तोहार सर्वनाश होइ जाई, वंश न चली, इ किला बीरान होइ जाई, इहां चमगादड़ अउर कबूतर बास करहिय. राजा चेत सिंह बाबा के आगे गिड़गिड़ाए लगलन. बहुत विनती कइलन. बाबा क गुस्सा थोड़ा शांत भयल तब कहलन कि ’’अब मुंहे से जवन निकलि गयल हौ, उ त वापस न होई, लेकिन हां, एही गद्दी पर 11वें पीठाधीश्वर के रूप में हम बालरूप में आइब तब शाप से मुक्त कइ देब।ʼʼ बाबा कीनाराम क शाप सही साबित भयल अउर 1781 में वारेन हेस्टिंग के सेना के हमला के बाद चेत सिंह के किला छोड़ि के भागय के पड़ल. दुबारा उ बनारस नाहीं लौटलन. किला पर अंगरेजन क कब्जा होइ गयल अउर बाद में चेत सिंह के बहिनी के लड़िका महीप नारायण सिंह के अंगरेजी हुकूमत दुगुना सालाना कर लगाइ के बनारस स्टेट क जिम्मेदारी सौंपि देहलस. राजा चेत सिंह क 29 मार्च, 1810 के ग्वालियर में निधन होइ गयल. राजा महीप नारायण सिंह रामनगर रहय लगलन अउर चेत सिंह क किला धीरे-धीरे बीरान होइ गयल. किला में कबूतर अउर चमगादड़ क बसेरा होइ गयल.चेत सिंह क सल्तनत त खतम होइ गयल, लेकिन बनारस की गद्दी पर जेतना भी राजा बइठलन, जादातर नावल्द रहलन अउर लड़िका गोद लेइ-लेइ के गद्दी चलल. क्रीकुंड के एक कार्यकर्ता के अनुसार, अठवां काशी नरेश विभूति नारायण सिंह क्रीकुंड के तत्कालीन अघोराचार्य बाबा अवधूत भगवान राम से शाप मुक्ति क बहुत प्रार्थना कइलन. अवधूत भगवान राम कहलन कि 11वीं गद्दी पर बाबा कीनाराम वापस अइहय तबय शाप मुक्ति संभव होइ पाई, उ भी तब जब उ 30 साल क उमर पार कइ लेइहय. 10 फरवरी, 1978 के मात्र नौ साल के उमर में बाबा 11वें पीठाधीश्वर के रूप में उपस्थित भइलन. बाबा क नया नाम अघोराचार्य बाबा सिद्धार्थ गौतम राम रहल. काशी राजघराना एह दिन क बेशब्री से इंतजार करत रहल. लेकिन अब बाबा के 30 साल क उमर पार करय क इंतजार होवय लगल. वर्ष 1999 में बाबा जइसय 30 साल क उमर पार कइलन, काशी राजघराना शाप मुक्ति के प्रयास में फिर से जुटि गयल. कार्यकर्ता के अनुसार, 20 अगस्त, 2000 के दिना राजकुमारी खुद अचानक बाबा के दरबार में पहुंचि गइलिन अउर शाप मुक्ति बदे बाबा से प्रार्थना कइलिन. बाबा आवय क आश्वासन देहलन.
बाबा सिद्धार्थ गौतम राम काशी नरेश के इहां 30 अगस्त, 2000 के पहुंचि गइलन. बाबा के स्वागत में रामनगर क पूरा महल शानदार तरीके से सजावल रहल. काशी नरेश खुद बाबा क स्वागत कइलन अउर अघोराचार्य बाबा सिद्धार्थ गौतम राम के महल के पूजा कक्ष में लेइ गइलन. पूजा-पाठ के बाद बाबा जलपान ग्रहण कइके काशी राजघराना के शाप मुक्त कइलन अउर राजा के आशीर्वाद देहलन. एकरे बाद काशी नरेश विभूति नारायण सिंह क पुत्र अनंत नारायण सिंह के दुइ ठे लड़िका भइलन -प्रद्युम्न नारायण सिंह अउर अनिरुद्ध नारायण सिंह. लेकिन चेत सिंह क किला आज भी बाबा कीनाराम क शाप भुगतत हौ. (लेखक सरोज कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)



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