दाभोलकर हत्याकांड: CBI ने जिस पिस्तौल को किया था बरामद, हत्या में नहीं हुआ था उसका इस्तेमाल

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नई दिल्ली: नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड (Dabholkar Murder Case) में एक नया मोड़ आ गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सीबीआई ने इस मर्डर केस में जो हथियार बरामद किए थे उसका असल में इस्तेमाल नहीं हुआ था. इस केस में सीबीआई ने 17 महीने पहले समुद्र से पिस्तौल बरामद किए थे और दावा किया गया था कि इसी से दाभोलकर को मारा गया. बता दें कि अंधविश्वास के खिलाफ काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर की 20 अगस्त 2013 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि असली हथियार का न मिलना इस केस में सीबीआई के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है. पिछले साल सीबीआई ने हथियार को समुद्र से निकालने के लिए करीब साढ़े सात करोड़ रुपये खर्च किए थे. इस मिशन के लिए सीबीआई ने नॉर्वे से गोताखोरों को बुलाया था. इसके अलावा हथियार तलाशने के लिए दुबई से एनविटेक मरीन कंसल्टेंट्स से कुछ मशीनें भी मंगाई गई थी.

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क्या कहा CFSL ने?

समुद्र से जो पिस्टल सीबीआई को मिली थी उसे जांच के लिए सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री (CFSL) भेजा गया था. यहां के एक्सपर्ट्स का कहना है कि हत्या में जिस गोली का इस्तेमाल किया गया था वो इस पिस्टल से मेल नहीं खाती है. ये गोलियां पुणे में घटनास्थल से मिली थी. जांच एजेंसियों का कहना है कि दाभोलकर 20 अगस्त 2013 को सड़क पर टहल रहे थे तभी सचिन अंदुरे और कालस्कर ने उन पर गोली चला दी.

कौन थे नरेंद्र दाभोलकर?

नरेंद्र दाभोलकर पेशे से डॉक्टर थे. वो समाज में फैले अंधविश्वास के खिलाफ भी काम करते थे. साल 1989 में उन्होंने महाराष्ट्र अंधविश्वास निर्मूलन समिति भी बनाई थी जिसके वो अध्यक्ष थे. सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में काम कर रहे दाभोलकर कई बार जान से मारने की धमकी भी मिली थी. 20 अगस्त 2013 को पुणे में जब वो मॉर्निंग वॉक पर निकले थे उसी दौरान उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

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