अखिल गोगोई को बरी करते हुए एनआईए कोर्ट ने कहा: हिंसा के लिए उकसाए बिना नाकाबंदी करना गैरकानूनी गतिविधि राेकथाम कानून के तहत आतंकी कृत्य नहीं

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गुवाहाटी4 मिनट पहले

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शिवसागर से निर्दलीय विधायक गोगोई

विशेष एनआईए कोर्ट ने डेढ़ साल से जेल में बंद असम के विधायक अखिल गोगोई को बरी कर दिया है। उन पर नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन में संलिप्तता के आरोप थे। ये प्रदर्शन असम के चांदमारी इलाके में दिसंबर-2019 में हुए थे। कोर्ट ने अपने आदेश मे कहा, ‘हिंसा के लिए उकसाए बिना नाकाबंदी करना गैरकानूनी गतिविधि राेकथाम कानून (यूएपीए) के तहत आतंकी कृत्य नहीं है।’ इसके साथ ही गुरुवार को अखिल गोगोई की जेल से रिहाई भी हो गई।

गुवाहाटी की विशेष कोर्ट के जज प्रांजल दास ने कहा, ‘लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन कभी-कभी नाकाबंदी (जाम) का रूप ले लेते हैं। इनसे नागरिकों को असुविधा भी होती है। इसके बावजूद यह संदेहास्पद है कि क्या हिंसा फैलाने के लिए उकसाए बिना अस्थाई नाकाबंदी आतंकी कृत्य होगा? मुझे लगता है कि विधायिका की भी ऐसी मंशा नहीं रही होगी।

इससे निपटने के लिए दूसरे कानून हो सकते हैं।’ कोर्ट ने कहा, ‘हमारे समक्ष पेश भाषण से गोगोई को हिंसा के लिए उकसाने के मामले में आरोपित नहीं किया जा सकता। प्रदर्शन के दौरान हिंसा और संपत्ति के नुकसान के पीछे भी गोगोई का हाथ होने के साक्ष्य नहीं हैं। ऐसी सामग्री भी नहीं है, जो साबित करे कि गोगोई का कृत्य देश की एकता-अखंडता के खिलाफ हो।’
मुझे जेल में रखने में कोई कसर नहीं छोड़ी : गोगोई

शिवसागर से निर्दलीय विधायक गोगोई को पिछले हफ्ते आंदोलन से जुड़े एक अन्य केस में बरी किया जा चुका था। गुरुवार को कोर्ट का आदेश केंद्रीय जेल पहुंचने के बाद उन्हें गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज अस्पताल से रिहा किया गया। रिहाई के बाद गोगोई ने कहा, ‘आखिर सच की जीत हुई। हालांकि मुझे सलाखों के पीछे रखने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई।’

सिर्फ कुछ लोगों के बयान से यह संकेत नहीं मिलता
कोर्ट ने कहा, ‘सिर्फ कुछ गवाहों के बयान से कोई नतीजा नहीं निकाला जा सकता। नाकाबंदी और जाम के बारे में बोलने से इस बात के सुबूत नहीं मिलते कि अखिल गोगोई ने ये बातें देश की आर्थिक सुरक्षा को खतरे में डालने के इरादे से कहीं। उनके खिलाफ आतंकरोधी कानून लगाने के लिए प्रथमदृष्टया यह पर्याप्त नहीं है।’ इसके साथ ही कोर्ट ने मामले के सहआरोपियों-धीरज कोंवर, मानस कोंवर और बिट्टू सोनोवाल को भी बरी कर दिया।

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